मुनीर-शहबाज की हालत खराब! नहीं सुधर रहे PoK के हालात, सड़कों पर अब सेना के खिलाफ लगे नारे

Pakistan Occupied Kashmir Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार के खिलाफ स्थानीय नागरिकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है. बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुके हैं.

Munir Shahbaz are in critical condition situation in PoK not improving
Image Source: Social Media/X

Pakistan Occupied Kashmir Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार के खिलाफ स्थानीय नागरिकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है. बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुके हैं.

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और आवागमन पूरी तरह ठप है.

पूरे PoK में अनिश्चितकालीन लॉकडाउन

इन प्रदर्शनों की अगुवाई संयुक्त कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है, जिसने सरकार के सामने कुल 38 मांगों की सूची रखी है. जैसे सत्ता वर्ग की विशेष सुविधाओं को खत्म करना, कश्मीरी प्रवासियों के लिए सुरक्षित की गई 12 विधानसभा सीटों को हटाना, और कश्मीर में चल रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर स्थानीय रॉयल्टी का अधिकार देना.

JKJAAC ने सोमवार से अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है, और प्रदर्शनकारियों ने राजधानी मुजफ्फराबाद समेत कई शहरों को जाम कर दिया है.

"हमें हक चाहिए, गोली नहीं"

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें बिजली, पानी और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं, और जब वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकार मांगते हैं, तो उन्हें बल प्रयोग और गोलीबारी का सामना करना पड़ता है.

JKJAAC प्रमुख शौकत नवाज मीर ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की गई, तो उसका जवाब दिया जाएगा.

मुख्यधारा मीडिया में चुप्पी, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो

पाकिस्तान का राष्ट्रीय मीडिया इस बड़े जन-आंदोलन से लगभग पूरी तरह मौन है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में सैकड़ों लोगों की भीड़, नारेबाज़ी और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ झंडे लहराते हुए लोग साफ देखे जा सकते हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान ISI समर्थित मुस्लिम कॉन्फ्रेंस पार्टी और JKJAAC के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी हुईं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ सकते हैं सवाल

जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंचों पर मानवाधिकारों का रक्षक बताता है, वहीं दूसरी ओर उसके ही कब्जे वाले क्षेत्र में जनता को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.

यह स्थिति अब सिर्फ एक स्थानीय आंदोलन नहीं, बल्कि एक बड़े मानवाधिकार संकट का संकेत देती है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर पड़ना तय है.

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