Jabalpur News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक असाधारण और समाजोपयोगी फैसला सुनाते हुए सतना जिले के कोतवाली थाना प्रभारी रविंद्र द्विवेदी को 1000 फलदार पौधे लगाने की सजा सुनाई है. यह सजा एक गंभीर आपराधिक मामले में कोर्ट के आदेश की अवहेलना के चलते दी गई है. अदालत ने यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और उत्तरदायित्व की मिसाल के तौर पर लिया है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2021 के एक नाबालिग से दुराचार केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी रामअवतार चौधरी को जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस फैसले के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में दायर की गई. हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2024 को पीड़िता को नोटिस तामील कराने का आदेश दिया था. लेकिन कोतवाली थाना प्रभारी द्वारा यह नोटिस समय पर नहीं पहुँचाया गया, जिससे अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई.
माफी के साथ आई प्रस्तावित सजा
थाना प्रभारी ने अपनी गलती स्वीकारते हुए कोर्ट से माफी मांगी और खुद ही 1000 पौधे लगाने का प्रस्ताव रखा. अदालत ने इसे मंजूरी देते हुए आम, जामुन, महुआ और अमरूद जैसे फलदार वृक्ष लगाने का निर्देश दिया, जिसे 1 जुलाई से 31 अगस्त 2025 के बीच पूरा करना होगा.
जीपीएस और फोटो सहित कोर्ट को देनी होगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लगाए गए पौधों की तस्वीरें और GPS लोकेशन सहित एक अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए. साथ ही, थाना प्रभारी को एक साल तक इन पौधों की देखरेख करनी होगी. सतना एसपी इस कार्य की निगरानी करेंगे और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेंगे.
अगली सुनवाई और संदेश
इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2025 को होगी. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य के लिए सभी खर्च थाना प्रभारी को अपनी जेब से उठाने होंगे. इससे पहले भी कोर्ट दिसंबर 2024 में 50 पेड़ लगाने का आदेश एक अन्य मामले में दे चुका है.
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