8th Pay Commission: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया. सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की शर्तों (Terms of Reference) को औपचारिक मंजूरी दे दी है.
इस निर्णय का सीधा असर देशभर के लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा. यह आयोग आने वाले वर्षों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी नीतियों में व्यापक सुधार की दिशा तय करेगा.
#WATCH | Delhi: The Union Cabinet, chaired by PM Modi, approved the Terms of Reference of the 8th Central Pay Commission.
— ANI (@ANI) October 28, 2025
Union Minister Ashwini Vaishnaw says, "The composition, the terms of reference, and the time period of the 8th Central Pay Commission have been approved by… pic.twitter.com/srQ5UYMk9N
आठवां वेतन आयोग: गठन और समय सीमा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय (Temporary Body) होगा. इसे अपनी स्थापना की तारीख से 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी.
आयोग में निम्नलिखित तीन प्रमुख सदस्य होंगे:
जरूरत पड़ने पर आयोग अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकेगा, ताकि सरकार प्रारंभिक स्तर पर भी आवश्यक निर्णय ले सके.
कब से लागू होंगी सिफारिशें?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी. अर्थात्, इस तारीख से लागू होने वाले संशोधन सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों पर लागू होंगे.
सामान्य तौर पर हर वेतन आयोग की सिफारिशें लगभग 10 वर्ष के अंतराल पर लागू की जाती हैं. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं, इसलिए 2026 को अगली अवधि के रूप में देखा जा रहा था.
किन विषयों पर करेगा काम आयोग
सरकार ने 8वें वेतन आयोग को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार और सिफारिशें देने का दायित्व सौंपा है. आयोग का मुख्य उद्देश्य केवल वेतन वृद्धि तय करना नहीं होगा, बल्कि यह देश की आर्थिक वास्तविकताओं और विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित सुझाव देगा.
निम्न प्रमुख विषय आयोग के एजेंडे में शामिल किए गए हैं:
देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence):
आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिफारिशें देश की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित न करें और राजकोषीय अनुशासन बना रहे.
विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन:
सरकार के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रहे, इसे ध्यान में रखकर सिफारिशें की जाएंगी.
पेंशन प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन:
गैर-योगदान आधारित (Non-contributory) पेंशन योजनाओं की वित्तीय स्थिरता और उनकी Unfunded Cost पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
राज्य सरकारों पर प्रभाव:
अधिकांश राज्य सरकारें केंद्र के वेतन आयोगों की सिफारिशों को कुछ संशोधनों के साथ अपनाती हैं. ऐसे में आयोग यह भी देखेगा कि इन सिफारिशों का राज्यों के बजट और वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है.
निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की वेतन संरचना से तुलना:
आयोग यह भी अध्ययन करेगा कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSUs) और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन, सुविधाएं और कार्य वातावरण किस स्तर पर हैं. इससे सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिलेगी.
क्यों जरूरी है नया वेतन आयोग?
केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन समय-समय पर इसलिए किया जाता है ताकि सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे, भत्तों, सेवानिवृत्ति लाभों और सेवा शर्तों की समीक्षा की जा सके.
देश की आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति (Inflation), और जीवनयापन लागत (Cost of Living) में हुए बदलावों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन में संशोधन की आवश्यकता पड़ती है.
7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद, कई संघों और कर्मचारी संगठनों ने सरकार से नया आयोग गठित करने की मांग की थी, ताकि महंगाई के अनुरूप वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की जा सके.
राजकोषीय जिम्मेदारी और विकास का संतुलन
केंद्र सरकार के लिए यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा कि वह राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) और कर्मचारियों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए.
वेतन आयोग की सिफारिशें सरकार के खर्च में बड़ा हिस्सा बनती हैं, इसलिए इन्हें लागू करने से पहले वित्त मंत्रालय को संभावित प्रभावों का गहराई से अध्ययन करना होगा. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिफारिशें 2026 से लागू होती हैं, तो इसका प्रभाव 2026–27 के केंद्रीय बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा.
अब तक कितने वेतन आयोग बने हैं
भारत में अब तक सात केंद्रीय वेतन आयोग गठित किए जा चुके हैं. पहला वेतन आयोग वर्ष 1946 में गठित किया गया था, जबकि सातवां आयोग वर्ष 2014 में स्थापित हुआ, जिसकी सिफारिशें 2016 से लागू की गईं.
हर आयोग ने समय के अनुसार वेतन, भत्तों, और पेंशन प्रणाली में बदलाव किए, जिससे सरकारी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ. अब 8वें वेतन आयोग से उम्मीद है कि यह आधुनिक कार्य प्रणाली और डिजिटल युग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार करेगा.
कर्मचारियों और पेंशनरों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (Basic Pay) में 20–30% तक बढ़ोतरी संभव है. इसके साथ महंगाई भत्ता (DA) और HRA (House Rent Allowance) जैसी सुविधाओं में भी संशोधन किए जा सकते हैं.
पेंशनभोगियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी पेंशन नई सैलरी संरचना के अनुसार पुनर्गणना (Revised Calculation) की जाएगी. साथ ही, आयोग कर्मचारियों की कार्य-जीवन संतुलन, रिमोट वर्क और डिजिटल वर्कस्पेस जैसे आधुनिक पहलुओं पर भी विचार कर सकता है.
अगले 18 महीनों में रिपोर्ट सौंपेगा आयोग
सरकार ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे. हालांकि, यदि आवश्यक हुआ, तो आयोग किसी विशेष मुद्दे पर अंतरिम रिपोर्ट (Interim Report) भी सौंप सकता है, ताकि सरकार प्रारंभिक स्तर पर सिफारिशें लागू करने पर विचार कर सके.