Trump in Davos 2026: दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों को आड़े हाथों लिया. अपने भाषण में ट्रंप ने यूरोप की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि यह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे यूरोपीय देशों से व्यक्तिगत रूप से प्यार करते हैं. ट्रंप की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद विवादित मानी जा रही है, खासकर उनके ग्रीनलैंड पर किए गए तर्क को लेकर.
अपने भाषण में ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा बताते हुए कहा कि अमेरिका को इसका मालिकाना हक मिलना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ पट्टे या लाइसेंस समझौते से ग्रीनलैंड की सुरक्षा करना संभव नहीं है. ट्रंप ने कहा, “कौन भला ऐसे पट्टे की रक्षा करना चाहेगा, जो समुद्र के बीचोंबीच बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा है. अगर युद्ध होता है, तो अधिकांश कार्रवाई वहीं होगी और मिसाइलें उसी बर्फ के टुकड़े के ऊपर से गुजरेंगी.”
🚨BREAKING: Donald Trump erupts at the World Economic Forum:
— Inevitable West (@Inevitablewest) January 21, 2026
"Certain places in Europe are not even recognisable anymore. We can argue but there's no argument. I love Europe but it's not headed in the right direction."pic.twitter.com/3Jdg1akRk5
नाटो गठबंधन को मजबूती देने का दावा
ट्रंप ने अपने भाषण में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को नाटो गठबंधन के लिए फायदेमंद बताया. उन्होंने कहा कि यह नाटो के लिए कोई खतरा नहीं है, बल्कि पूरे गठबंधन की सुरक्षा और मजबूती बढ़ाएगा. ट्रंप ने यूरोप की आलोचना करते हुए कहा कि नाटो ने अमेरिका के साथ सही व्यवहार नहीं किया. उनका यह बयान यूरोपीय नेताओं के लिए सीधे तौर पर चुनौती की तरह है.
यूरोप की नीतियों पर कटाक्ष
ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की नीतियों पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि यूरोप को अमेरिका की सरकार से सीखना चाहिए. उनका कहना था कि यूरोप की इमिग्रेशन और आर्थिक नीतियों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा, जबकि अमेरिका ने अपने आंतरिक सुधारों और नीतियों से बड़े बदलाव किए.
दूसरे विश्व युद्ध का हवाला
अपने भाषण में ट्रंप ने इतिहास का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ग्रीनलैंड की मदद की थी और अब अमेरिका को इसका मालिकाना हक मिलना चाहिए. ट्रंप ने कहा कि यह किसी तरह यूरोप के खिलाफ नहीं है, बल्कि अमेरिकी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए जरूरी है.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर
ट्रंप के इस बयान से वैश्विक राजनीति में हलचल मची हुई है. ग्रीनलैंड पर उनके दावा ने डेनमार्क और यूरोप के कई देशों को असहज कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय नीति में एक नए रुख को दर्शाता है, जिसमें अमेरिका ‘अमेरिका फर्स्ट’ के तहत अपने हितों को सर्वोपरि रख रहा है.
ट्रंप की रणनीति
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का ग्रीनलैंड पर जोर सिर्फ एक भू-राजनीतिक कदम नहीं है. यह संदेश भी है कि अमेरिका अब पुराने गठबंधनों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि खुद की सुरक्षा और रणनीति तय करेगा. उनका यह बयान न केवल यूरोप, बल्कि चीन और रूस जैसी महाशक्तियों के लिए भी संकेत है कि अमेरिका अब सीधे तौर पर अपनी ताकत दिखाने को तैयार है.
ट्रंप के इस भाषण ने दावोस में अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल मचा दी है. ग्रीनलैंड पर उनका दावा और यूरोप की आलोचना आगामी महीनों में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है.
ये भी पढ़ें- अपराधियों की हर चाल होगी नाकाम, गणतंत्र दिवस पर इस खास चश्मे से नजर रखेगी दिल्ली पुलिस