अगर नहीं चुकाई EMI तो लॉक हो जाएगा आपका फोन! RBI का नया नियम लोन डिफॉल्टर्स पर कसेगा शिकंजा

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अब कर्ज वसूली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नए नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत लोन नहीं चुकाने पर उधारकर्ता का मोबाइल फोन दूर से लॉक किया जा सकेगा.

Missed loan payments could get your phone locked RBI may bring new rule
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नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अब कर्ज वसूली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नए नियम पर विचार कर रहा है, जिसके तहत लोन नहीं चुकाने पर उधारकर्ता का मोबाइल फोन दूर से लॉक किया जा सकेगा. यह कदम कर्जदाताओं की ताकत बढ़ाने और डिफॉल्ट मामलों पर लगाम लगाने के मकसद से उठाया जा रहा है.

कैसे काम करेगा ये नियम?

इस प्रस्तावित नियम के तहत जब कोई ग्राहक लोन पर मोबाइल या अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खरीदेगा, तो उस डिवाइस में एक ऐसा ऐप इंस्टॉल किया जाएगा जो जरूरत पड़ने पर उसे लॉक कर सकेगा. यदि ग्राहक समय पर EMI नहीं चुकाता, तो कर्जदाता रिमोट के जरिए फोन को लॉक कर सकता है. हालांकि, इस दौरान ग्राहक का पर्सनल डेटा सुरक्षित रहेगा, और लॉकिंग केवल डिवाइस के एक्सेस को प्रभावित करेगी.

कर्जदाताओं को मिलेगा फायदा

RBI इस समय फेयर प्रैक्टिस कोड में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है, जिससे इस तरह के फोन-लॉकिंग मैकेनिज्म को औपचारिक दिशा-निर्देशों के तहत लाया जा सके. इस कदम से बजाज फाइनेंस, डीएमआई फाइनेंस और चोलमंडलम फाइनेंस जैसी कंपनियों को रिकवरी में मदद मिल सकती है. हालांकि, इस प्रस्ताव ने उपभोक्ता अधिकारों को लेकर चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं. यह सवाल उठ रहा है कि क्या डिवाइस लॉक करना एक उचित वसूली तरीका है?

लोन पर फोन खरीदने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी

Home Credit Finance की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, एक-तिहाई से अधिक लोग मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स लोन पर खरीदते हैं. वहीं, देश में 1.16 बिलियन से अधिक मोबाइल कनेक्शन हैं, जो दर्शाता है कि यह नियम कितने बड़े वर्ग को प्रभावित कर सकता है.

डिफॉल्ट रिस्क और छोटी रकम वाले लोन

क्रेडिट ब्यूरो CRIF High Mark के अनुसार, ₹1 लाख से कम के कंज्यूमर लोन में डिफॉल्ट का खतरा सबसे अधिक होता है. ऐसे में यह नया नियम छोटे कर्जों की वसूली में गेम चेंजर साबित हो सकता है.

रिकवरी के साथ-साथ डेटा सुरक्षा भी RBI की प्राथमिकता

RBI की योजना है कि यह नया सिस्टम लागू करते वक्त दो मुख्य बातों का संतुलन बनाए रखा जाए. पहला कर्जदाता को उसका बकाया वापस दिलाना. दूसरा उपभोक्ता के डेटा और अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करना. अभी तक RBI ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में इस पर औपचारिक गाइडलाइंस जारी हो सकती हैं.

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