मंगोलिया के साथ सैन्य अभ्यास, 1 बिलियन डॉलर की मदद... क्या भारत कर रहा है चीन को घेरने की तैयारी?

दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच बसी मंगोलिया, भले ही भूगोल के लिहाज से एक छोटा और सीमित देश है, लेकिन भारत के साथ उसका संबंध अब कहीं अधिक गहरा, रणनीतिक और दूरगामी महत्व रखने लगा है.

Military exercise started between India and Mongolia
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- X

नई दिल्ली/उलानबटार: दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच बसी मंगोलिया, भले ही भूगोल के लिहाज से एक छोटा और सीमित देश है, लेकिन भारत के साथ उसका संबंध अब कहीं अधिक गहरा, रणनीतिक और दूरगामी महत्व रखने लगा है. हाल ही में शुरू हुई 'नोमैडिक एलिफेंट 2025' सैन्य अभ्यास इसी मजबूत होते संबंध का प्रतीक है.

इस द्विपक्षीय अभ्यास में भारत के 45 सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनमें कई अरुणाचल स्काउट्स से हैं, एक ऐसी यूनिट जो पर्वतीय युद्ध में प्रशिक्षित है और संवेदनशील पूर्वी सीमाओं पर तैनात रहती है. यह भारत की ओर से एक व्यावहारिक और रणनीतिक चयन है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब भारत अपनी सुरक्षा-नीति को केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर साझेदारियों के ज़रिये प्रभाव का विस्तार कर रहा है.

भारत की प्रतिक्रियात्मक रणनीति

मंगोलिया की सीमाएं केवल दो देशों रूस और चीन से लगती हैं. ऐसे में, भारत की सैन्य उपस्थिति और सहयोग की पहल कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय है. भले ही भारत की सीमाएं मंगोलिया से नहीं मिलतीं, लेकिन वह सांस्कृतिक, धार्मिक और अब रक्षा सहयोग के माध्यम से इस भूभाग में महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करा रहा है.

चीन की क्षेत्रीय रणनीति पर भारत की यह पहल एक संतुलित प्रतिक्रिया मानी जा रही है, जहां भारत शक्ति-प्रदर्शन से अधिक, साझेदारी और सहयोग के माध्यम से अपने हितों को सुरक्षित कर रहा है.

सांस्कृतिक आधार पर मज़बूत होती दोस्ती

भारत और मंगोलिया का रिश्ता केवल रणनीतिक नहीं, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी जुड़ा है. मंगोलिया एक बौद्ध बहुल राष्ट्र है और भारत बौद्ध परंपराओं का उद्गम स्थल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2015 की यात्रा में दिए गए बौद्ध ग्रंथों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण में मदद ने इस सांस्कृतिक रिश्ते को एक नई दिशा दी.

भारत की यह ‘सॉफ्ट पावर’ नीति मंगोलिया जैसे देशों में चीन के प्रभाव के विकल्प के रूप में देखी जा रही है – जहां मजबूरी नहीं, सहयोग और सम्मान पर आधारित संबंधों को तरजीह दी जाती है.

नोमैडिक एलिफेंट: अभ्यास से आगे की साझेदारी

नोमैडिक एलिफेंट अभ्यास में केवल परंपरागत सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि आधुनिक जरूरतों के अनुरूप साइबर वॉर, आतंकवाद विरोधी अभियान, पर्वतीय ऑपरेशन और संयुक्त राष्ट्र मिशन सिमुलेशन शामिल हैं. यह इंगित करता है कि भारत और मंगोलिया के संबंध सामरिक विश्वसनीयता की दिशा में बढ़ रहे हैं.

इसके अलावा, भारत ने मंगोलिया को 1 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता, रेलवे और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और यूरेनियम सहयोग के माध्यम से दीर्घकालिक संबंधों की नींव मजबूत की है.

चीन के दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत

भारत और मंगोलिया की यह बढ़ती निकटता चीन के लिए एक नई चुनौती पेश करती है, विशेषकर तब जब वह ऐतिहासिक रूप से मंगोलिया को अपने प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानता रहा है. हालांकि भारत की नीति टकराव की नहीं, बल्कि विकल्प और संतुलन की है. मंगोलिया जैसे देशों के लिए भारत एक ऐसा साझेदार बनकर उभर रहा है जो स्थिरता, सम्मान और दीर्घकालिक सहयोग की पेशकश करता है.

भविष्य की रणनीति: बहुस्तरीय दृष्टिकोण

भारत की विदेश नीति अब बहुपक्षीय और बहुआयामी हो रही है, जिसमें सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक कूटनीति मिलकर काम कर रही है. मंगोलिया में सैन्य अभ्यास, इंडो-पैसिफिक में क्वाड साझेदारी, अंडमान-निकोबार और मध्य एशिया में बंदरगाह विकास ये सभी संकेत देते हैं कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीतिक खिलाड़ी बनने की ओर अग्रसर है.

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