Iran US War Threat: पश्चिम एशिया एक बार फिर गंभीर भू-राजनीतिक तनाव की गिरफ्त में है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लगातार तीखी होती बयानबाजी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. इसी बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ का एक बड़ा और आक्रामक बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है.
एक आपातकालीन संसदीय बैठक को संबोधित करते हुए गालिबाफ ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान इस समय सिर्फ इजराइल और अमेरिका से सैन्य टकराव नहीं झेल रहा, बल्कि आर्थिक, मानसिक-मनोवैज्ञानिक और आतंकी स्तर पर भी एक बहुस्तरीय संघर्ष से गुजर रहा है.
बहुस्तरीय युद्ध की चेतावनी
मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान पर दबाव केवल हथियारों के जरिए नहीं बनाया जा रहा, बल्कि यह एक व्यापक लड़ाई है. उनके मुताबिक, आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जबकि दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए जनता के मनोबल को तोड़ने का प्रयास हो रहा है. इसके साथ ही सुरक्षा और आतंकी खतरे भी लगातार ईरान के सामने खड़े किए जा रहे हैं. गालिबाफ ने कहा कि ईरान इन सभी मोर्चों को भली-भांति समझता है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है.
अमेरिका को खुली सैन्य चेतावनी
ईरानी संसद अध्यक्ष का सबसे सख्त बयान अमेरिका को लेकर सामने आया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया, तो तेहरान चुप नहीं बैठेगा. गालिबाफ ने दो टूक कहा कि ऐसी स्थिति में इजराइल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक ठिकाने ईरान के वैध लक्ष्य होंगे. उनके इस बयान को अमेरिका और इजराइल दोनों के लिए सीधी धमकी के तौर पर देखा जा रहा है.
पहले भी दोहराया जा चुका है यही रुख
ईरान इससे पहले भी कई बार यह साफ कर चुका है कि वह किसी भी हमले का कड़ा जवाब देगा. ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि तेहरान अब किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सतर्क और आक्रामक रणनीति अपनाने के मूड में है. जानकारों का मानना है कि ईरान यह संदेश देना चाहता है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो उसका असर पूरे क्षेत्र में महसूस किया जाएगा.
IRGC हाई अलर्ट पर, तेज हुई सैन्य तैयारियां
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपनी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है. बताया जा रहा है कि यह अलर्ट 12 जून को हुए कथित इजरायली हमले के बाद लगाए गए अलर्ट से भी ज्यादा गंभीर है. ईरान को आशंका है कि अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इसी वजह से तेहरान समेत कई शहरों में एयर डिफेंस और मिसाइल एक्सरसाइज कराई गई हैं. रडार स्टेशन सक्रिय किए गए हैं और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए गए हैं.
मध्य पूर्व के आसमान में अमेरिकी विमानों की हलचल
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस से जुड़े दावों ने तनाव को और बढ़ा दिया है. इन दावों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी वायुसेना के कई विमान मध्य पूर्व के आसमान में देखे गए हैं. इजरायली मीडिया आउटलेट NEWSru.co.il की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के रिफ्यूलिंग टैंकर और भारी सैन्य परिवहन विमान जैसे C-5 और C-17 ग्लोबमास्टर इस क्षेत्र में सक्रिय नजर आए हैं. इसके अलावा KC-135 स्ट्रैटोटैंकर, KC-46A पेगासस और C-5M गैलेक्सी जैसे विमानों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा है. हालांकि अमेरिका के रक्षा विभाग की ओर से अब तक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
युद्ध या नियमित सैन्य अभ्यास?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार इस तरह के सैन्य विमानों की तैनाती का मतलब सीधे युद्ध की तैयारी नहीं होता. अमेरिका पहले भी नियमित सैन्य अभ्यास और लॉजिस्टिक मूवमेंट के तहत ऐसे विमान क्षेत्र में भेजता रहा है. लेकिन मौजूदा हालात, ईरान की सख्त चेतावनियों और बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए यह जरूर कहा जा सकता है कि स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है.
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