MiG-21 Bison या LCA Tejas कौन ज्यादा बेहतर? पूर्व वायुसेना प्रमुख के बयान पर छिड़ी बहस; जानें ताकत

भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के हालिया बयान ने रक्षा जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. उन्होंने कहा कि 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद पाकिस्तान के साथ हुई हवाई मुठभेड़ के समय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को अग्रिम मोर्चों पर तैनात करने की स्थिति में नहीं था.

Mig 21 bison and lca tejas fighter jet which is better know power
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भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के हालिया बयान ने रक्षा जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. उन्होंने कहा कि 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक और उसके बाद पाकिस्तान के साथ हुई हवाई मुठभेड़ के समय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को अग्रिम मोर्चों पर तैनात करने की स्थिति में नहीं था. उनका कहना था कि उस समय तेजस पूरी तरह से तैयार नहीं था, इसलिए वायुसेना को मिग-21 जैसे पुराने जेट्स का सहारा लेना पड़ा.

इस बयान के बाद विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों ने धनोआ के दृष्टिकोण पर सवाल उठाए हैं और तेजस की तकनीकी श्रेष्ठता का हवाला देते हुए इसे मिग-21 से कहीं बेहतर विकल्प बताया है.

बालाकोट हमला और विंग कमांडर अभिनंदन की बहादुरी

26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. इसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, और दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच एक खतरनाक हवाई संघर्ष हुआ. 

इस डॉगफाइट में मिग-21 बाइसन पर तैनात विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान ने बहादुरी से एक पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया, लेकिन उनका मिग-21 भी दुश्मन की मिसाइल से क्षतिग्रस्त हो गया. उन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में गिरने के बाद बंदी बना लिया गया, और बाद में भारत को सौंपा गया. यह घटना मिग-21 जैसे पुराने विमानों की सीमाओं को उजागर करने के लिए काफी थी, और इसी के साथ यह सवाल उठा कि तेजस जैसे आधुनिक विमान को उस समय क्यों नहीं भेजा गया?

क्या तेजस 2019 में युद्ध के लिए तैयार नहीं था?

एयर चीफ मार्शल धनोआ के अनुसार, 2019 में तेजस केवल प्रारंभिक ऑपरेशनल क्लीयरेंस (IOC) स्टेज में था और ऐसे मिशन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था. उनके अनुसार, उस समय तेजस को श्रीनगर या पठानकोट जैसे अग्रिम मोर्चों पर तैनात करना व्यावहारिक नहीं था क्योंकि न तो वहां लॉजिस्टिक सपोर्ट था और न ही पर्याप्त ग्राउंड स्टाफ. वहीं, मिग-21, सुखोई-30 और मिराज-2000 पहले से ही उन ठिकानों पर तैनात थे और चालक दल इन विमानों के साथ बेहतर तरीके से परिचित था.

तेजस की प्रदर्शन क्षमता: एक नजर

धनोआ के बयान के उलट, तेजस ने 2013 में आयरन फिस्ट अभ्यास के दौरान अपनी प्रभावशाली युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया था. राजस्थान के पोखरण में हुए इस अभ्यास में तेजस ने R-73 क्लोज-कॉम्बैट मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम और फ्लेयर्स जैसे आधुनिक हथियारों का सफल परीक्षण किया था. इसके अलावा, तेजस में बेहतर एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट, फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और रडार जैमिंग क्षमताएं मौजूद थीं, जो मिग-21 में नहीं थीं.

2018 तक तेजस ने फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (FOC) की कई प्रमुख क्षमताएं हासिल कर ली थीं. कलाईकुंडा एयरबेस पर किए गए परीक्षणों में तेजस ने एल्टा EL/M-2032 रडार के साथ डर्बी BVR मिसाइल को भी सफलतापूर्वक फायर किया, जो इसे दूर-दराज के लक्ष्यों पर भी हमला करने में सक्षम बनाता है.

मिग-21 बनाम तेजस: कौन बेहतर?

मिग-21 एक समय का अत्याधुनिक विमान था, लेकिन 1960 के दशक की तकनीक आज के आधुनिक हवाई युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है. इसका रडार सीमित दूरी तक ही काम करता है और इसमें कोई उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम नहीं है. तेजस इसके मुकाबले एक चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान है, जो न केवल बेहतर रडार तकनीक और हथियार प्रणालियों से लैस है, बल्कि इसका डिज़ाइन भी दुश्मन की रडार पकड़ से बचने में मदद करता है. युद्ध की परिस्थिति में तेजस ज्यादा मैन्यूवेरेबल और प्रतिक्रियाशील साबित हो सकता था.

तेजस की सीमाएं: 2019 में क्यों नहीं चुना गया?

हालांकि तेजस तकनीकी रूप से बेहतर था, फिर भी उसे 2019 के संघर्ष में अग्रिम मोर्चों पर न भेजने के पीछे कुछ ठोस कारण थे: फरवरी 2019 तक तेजस के केवल 16 विमान ही वायुसेना के पास थे, जो सुलूर (तमिलनाडु) में तैनात थे उत्तर भारत के मोर्चे से बहुत दूर. तेजस के IOC संस्करण में कुछ सीमाएं थीं, जैसे कि अत्याधुनिक ASTRA मिसाइल या फुली इंटीग्रेटेड स्वदेशी EW सिस्टम की अनुपस्थिति. अग्रिम एयरबेस पर तेजस के लिए न तो पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स थे, न ही अनुभवी टेक्निकल स्टाफ. मिग-21 की संख्या ज्यादा थी और इनसे वायुसेना की लंबी परिचिती थी — भले ही जोखिम ज्यादा हो.

तेजस का भविष्य और इंजन की ताकत

बालाकोट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पुराने विमानों की जगह अब आधुनिक जेट्स को लेना ही होगा. तेजस इस दिशा में एक मजबूत कदम है. वर्तमान में यह अमेरिकी GE F404 इंजन से संचालित होता है, और आगामी तेजस MK-2 संस्करण में GE F414 इंजन का इस्तेमाल होगा — जो इसे ज्यादा ताकतवर बनाएगा. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब तेजस के उत्पादन में तेजी लाने और उसके रखरखाव नेटवर्क को मजबूत करने में जुटा है. आने वाले वर्षों में यह विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनने की ओर अग्रसर है.

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