तेहरान: ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, और विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. विरोध अब न केवल बड़े शहरों में, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक भी फैल चुका है. सोशल मीडिया पर इन प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या ईरान में कोई ऐसा विपक्षी दल या गुट मौजूद है, जो मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंके और सत्ता की बागडोर संभाल सके?
ईरान में विरोध का फैलाव और हिंसक झड़पें
विरोध-प्रदर्शनों ने अब तक ईरान के सभी 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों तक अपना असर डाला है. मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, इस दौरान 34 से अधिक प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि करीब 2200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा, ईरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर लॉर्डेगन में कुछ हथियारबंद हमलावरों ने दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी. इन घटनाओं ने विरोध को और भी तेज कर दिया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान में शासन परिवर्तन की कोई संभावना है?
अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जारी रखती है, तो अमेरिका "लॉक और रेडी" है, यानी अमेरिका की मिसाइलें तैनात हैं. इसके जवाब में, ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने इसे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए चेतावनी दी कि इस प्रकार के बयानों को बिना प्रतिक्रिया के नहीं छोड़ा जाएगा. यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है.
ईरानी विपक्ष की बड़ी ताकतें
ईरान में मौजूदा सरकार के खिलाफ विरोध करने वाली कई प्रमुख ताकतें सक्रिय हैं. इनमें शाही परिवार, पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन, और जातीय अल्पसंख्यक समूह शामिल हैं.
शाही परिवार और उनके समर्थक
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान से बाहर भागे शाही परिवार के सदस्य, खासकर रेजा पहलवी, जो वर्तमान में अमेरिका में निर्वासन जीवन जी रहे हैं, कई ईरानी प्रवासियों में लोकप्रिय हैं. वे ईरान में राजशाही की वापसी के पक्षधर हैं, लेकिन यह विचार ईरान के भीतर कितना प्रचलित है, यह कहना कठिन है.
पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन
1970 के दशक में ईरान में शाह की सरकार और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ बमबारी करने वाले पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन का प्रभाव भी बड़ा है. इस संगठन का नेतृत्व अब मसूद राजावी की पत्नी, मरियम राजावी करती हैं, और यह संगठन पश्चिमी देशों में सक्रिय है.
जातीय अल्पसंख्यक समूह
ईरान के कुर्द और बलूच समुदाय, जो सुन्नी मुस्लिम हैं, अक्सर शिया मुस्लिम सरकार के खिलाफ खड़े रहते हैं. कई कुर्द समूहों ने सरकारी बलों के खिलाफ विद्रोह किया है, जबकि बलूच समुदाय के लोग अपने लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
ईरान में चल रहे आंदोलनों का इतिहास
पिछले एक दशक में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. 2009 में हुए राष्ट्रपति चुनावों के बाद चुनावी धांधली के आरोपों के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे. फिर 2022 में महिला अधिकारों को लेकर विरोध प्रदर्शन का एक और दौर चला था, जिसे 'नारी, जीवन, स्वतंत्रता' का नाम दिया गया था. हालांकि, इन प्रदर्शनों में किसी भी प्रकार की स्पष्ट नेतृत्व की कमी रही, जिससे उनका असर सीमित रहा.
ये भी पढ़ें: युद्ध की तैयारी कर रहे ट्रंप? रक्षा बजट को बढ़ाकर किया 1.5 ट्रिलियन डॉलर, जानें क्यों लिया बड़ा फैसला