Mauni Amavasya 2026: साल की पहली मौनी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख और विधि

Mauni Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का अपना अलग ही आध्यात्मिक महत्व है. यह दिन जहां एक ओर पितरों की स्मृति, तर्पण और शांति से जुड़ा होता है, वहीं दूसरी ओर आत्मसंयम, साधना और अंतर्मन की शुद्धि का अवसर भी प्रदान करता है.

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Mauni Amavasya 2026: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का अपना अलग ही आध्यात्मिक महत्व है. यह दिन जहां एक ओर पितरों की स्मृति, तर्पण और शांति से जुड़ा होता है, वहीं दूसरी ओर आत्मसंयम, साधना और अंतर्मन की शुद्धि का अवसर भी प्रदान करता है. वर्ष 2026 की पहली अमावस्या को लेकर विशेष चर्चा इसलिए भी है क्योंकि यह मौनी अमावस्या के रूप में पड़ रही है, जिसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है. शास्त्रों में इसे वर्ष की सबसे श्रेष्ठ अमावस्या माना गया है.

मौनी अमावस्या 2026 की तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 17 जनवरी 2026, शनिवार की रात 12 बजकर 04 मिनट से होगा और इसका समापन 18 जनवरी 2026, रविवार की रात 01 बजकर 21 मिनट पर होगा. उदया तिथि को महत्व दिए जाने के कारण मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा. इसी दिन पवित्र स्नान, दान, तर्पण और अमावस्या से जुड़े धार्मिक कर्म करना श्रेष्ठ माना गया है.

स्नान, दान और तर्पण का पुण्यकाल

मौनी अमावस्या पर स्नान और दान के लिए दिन भर कई शुभ समय बन रहे हैं. सुबह के समय लगभग 08 बजकर 35 मिनट से 11 बजकर 16 मिनट तक का काल विशेष फलदायी माना गया है. इसके बाद दोपहर में 01 बजकर 57 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक और शाम के समय 06 बजे से रात 09 बजकर 18 मिनट तक का समय भी धार्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त बताया गया है. इन समयों में पवित्र नदी में स्नान या घर पर स्नान कर तिल और कुश से पितरों का तर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक अर्थ

मौनी अमावस्या का संबंध ‘मौन’ से है. इस दिन वाणी पर संयम रखने, अनावश्यक बोलचाल से दूर रहने और आत्मचिंतन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. मान्यता है कि मौन व्रत रखने से मन पर नियंत्रण होता है, मानसिक अशांति दूर होती है और व्यक्ति भीतर से अधिक संतुलित महसूस करता है. यह दिन साधना, ध्यान और जप के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है.

पितरों की शांति के लिए विशेष तिथि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने की सबसे उत्तम तिथियों में से एक है. जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए इस दिन तर्पण, जलांजलि या पिंडदान करना विशेष लाभकारी बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए दान और पुण्य कर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं.

क्या दान करना माना जाता है शुभ

मौनी अमावस्या पर जरूरतमंदों को कंबल, अन्न, तिल, गुड़, काले तिल, वस्त्र या भोजन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इसके साथ ही मौन रहकर ध्यान, जप और गीता, रामायण या अन्य पवित्र ग्रंथों का पाठ करने से भी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह दिन केवल बाहरी कर्मकांड का नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धि का भी प्रतीक है.

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