मुश्किल में मार्क जुकरबर्ग! फेसबुक-इंस्टा को अमेरिकी कोर्ट ने बताया बच्चों के लिए खतरा, लगाया तगड़ा जुर्माना

META-Facebook News: मेटा को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की एक कोर्ट ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है. यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर आया है.

Mark Zuckerberg American court declared Facebook-Insta a danger to children imposed heavy fine
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META-Facebook News: मेटा को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की एक कोर्ट ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है. यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर आया है.

अमेरिका के न्यू मेक्सिको में एक जूरी ने पाया कि मेटा के प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. कोर्ट का मानना है कि कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खतरों को छिपाया और मुनाफे के लिए नियमों का सही से पालन नहीं किया. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी पर आरोप है कि उसके प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चे गलत कंटेंट और खतरनाक लोगों के संपर्क में आ सकते हैं.

किन प्लेटफॉर्म्स पर सवाल

मेटा, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की मालिक कंपनी है. जूरी का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.

कोर्ट का फैसला क्या कहता है

कोर्ट ने कहा कि कंपनी ने यूजर्स को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के बारे में सही जानकारी नहीं दी. साथ ही यह भी माना गया कि बच्चों को गलत कंटेंट और ऑनलाइन खतरों से बचाने में कंपनी नाकाम रही. इस वजह से कोर्ट ने कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया है.

कंपनी का क्या कहना है

मेटा ने इस फैसले से असहमति जताई है. कंपनी का कहना है कि वह इस फैसले को चुनौती देगी और आगे अपील करेगी. यह मामला राउल टोरेज ने दायर किया था. उन्होंने कहा कि यह फैसला बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी जीत है. उनका आरोप था कि कंपनी को पहले से पता था कि उसके प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद उसने जरूरी कदम नहीं उठाए.

कैसे चला पूरा केस

यह केस करीब 6 हफ्ते तक चला. इसमें कई गवाहों की गवाही ली गई और सैकड़ों दस्तावेजों की जांच की गई. कुछ कर्मचारी भी गवाही में शामिल हुए, जिन्होंने कंपनी के अंदर की जानकारी दी. अंत में जूरी ने करीब एक दिन विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया.

क्यों है यह फैसला खास

यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह उन शुरुआती मामलों में से एक है, जहां सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार ठहराया गया है. कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि अब दुनिया भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ रही है और कंपनियों से ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जा रही है.

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