रोहतक: केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संविधान स्वतंत्र भारत की गीता है. जिस तरह से जीवन जीने के लिए गीता की भूमिका है, उसी तरह देश और समाज को चलाने के लिए पवित्र ग्रंथ संविधान जरूरी है. संविधान हर नागरिक, समाज, धर्म और संप्रदाय का आदर करने वाला ग्रंथ है. संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर का देश के निर्माण और विकास में सबसे बड़ा योगदान है, मगर कांग्रेस ने हमेशा उनके योगदान और भूमिका को अनदेखा किया और मोदी सरकार ने उन्हें सम्मान दिया.
केंद्रीय मंत्री ने डॉ. अंबेडकर को नमन कर पुष्प अर्पित किए
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रविवार को राष्ट्रीय युवा दिवस पर एमडीयू के सभागार में युवा गौरव उत्सव समिति के सौजन्य से आयोजित संविधान गौरव समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे. समारोह में पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री का कार्यक्रम संयोजक सुदेश कटारिया ने पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया और संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर का स्मृति चिन्ह भेंट किया. समारोह में सेवानिवृत आईएएस दिलीप कुमार विशिष्ट अतिथि और पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर की विशेष गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजबीर सिंह ने अध्यक्षता की. केंद्रीय मंत्री ने युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद और संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर को नमन कर पुष्प अर्पित किए.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कांग्रेस संविधान सम्मान का दिखावा कर रही है, लेकिन उन्होंने संविधान निर्माता को सम्मान नहीं दिया. मोदी सरकार ने संविधान निर्माता अंबेडकर के जीवन से जुड़े स्थलों पर स्मारक बनाने के साथ, जहां पर लंदन में उन्होंने पढ़ाई की थी, उसे खरीदकर अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय बनाने का काम किया.
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर ने समाज हित में काम किया. समाज और देश को विकसित करने के लिए युवाओं को आह्वान किया. देश और समाज को सही दिशा देने का काम दोनों महानुभावों ने किया. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता के लिए डॉ. अंबेडकर को संसद जाने से रोका. महाराष्ट्र से उन्हें उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन उन्हें कांग्रेस ने जानबूझकर कर हराया. पश्चिम बंगाल से योगेंद्र नाथ मंडल ने डॉ. अंबेडकर के लिए अपनी सीट त्याग दी और उन्हें बंगाल से जिताया, उसके बाद देशभर से चुनकर आए लोगों ने उन्हें संविधानसभा का अध्यक्ष मनोनीत किया.
कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए किया संविधान में संशोधन
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संविधान बनने से लेकर 2023 तक संविधान में 106 संशोधन हुए. इनमें से 75 संशोधन कांग्रेस के कार्यकाल के प्रधानमंत्रियों ने किए, जबकि 22 ऐसे संशोधन हैं, जोकि भाजपा के प्रधानमंत्रीत्व कार्यकाल में हुए. इनमें प्रमुख रूप से बीसी आयोग, जनजाति आयोग, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण, बैकलॉग को भरना, 10 प्रतिशत EWS को आरक्षण प्रमुख हैं. कांग्रेस ने हमेशा सत्ता स्वार्थ की राजनीति की है, जबकि भाजपा के लिए देश हित सर्वोपरि है. कांग्रेस ने अपने स्वार्थों के हिसाब से संविधान में संशोधन किए. आपातकाल लगाने से लेकर राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना कांग्रेस के स्वार्थों का सबसे बड़ा उदाहरण है. यही नहीं कांग्रेस ने आरक्षण का बंटवारा धर्म के नाम पर किया, जबकि संविधान में स्पष्ट उल्लेखित है कि आरक्षण दबे-कुचले, शोषित व पिछड़ा वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए है.
संविधान के नाम पर कांग्रेस ने जनता को किया गुमराह
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने संविधान के नाम पर जनता को गुमराह किया. कांग्रेस ने एक नेरेटिव खड़ा किया कि अगर भाजपा की 400 सीटें आ गई तो मोदी संविधान को समाप्त कर देंगे. जब संसद की कार्यवाही शुरू हुई तो 10 प्रतिशत कार्यवाही भी नहीं चल पाई. इसी विषय पर संसद की कार्यवाही बहस की भेंट चढ़ गई. इस भ्रम को फैलाने के लिए संविधान के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी है, क्योंकि जितना अपमान संविधान का कांग्रेस ने किया, आज तक किसी पार्टी ने नहीं किया. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की परंपरा को शुरू किया गया और इसका भी कांग्रेस ने विरोध किया था. कांग्रेस का तर्क था कि जब 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है तो संविधान दिवस मनाने का कोई औचित्य नहीं है.
मनोहर ने किया दलितों का उत्थान, पदोन्नति में दिया आरक्षण
सेवानिवृत आईएएस दलीप सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने सही मायनों में दलितों का उत्थान किया, जिसे आज मुख्यमंत्री नायब सिंह की सरकार आगे बढ़ा रही है. 1966 से लेकर 2014 तक कितनी सरकारें बनी, सभी ने दलितों को वोटबैंक के तौर पर इस्तेमाल किया और पूर्व की कांग्रेस सरकार में दलितों ने सबसे ज्यादा अत्याचार सहे. गोहाना व मिर्चपुर कांड को दलित अभी तक भूले नहीं हैं, मगर जब 2014 में मनोहर लाल ने प्रदेश की कमान संभाली तो उन्होंने दलित वर्ग की सबसे बड़ी मांग पदोन्नति में आरक्षण को लागू किया. इसके साथ ही उन्होंने एससी कमीशन व सफाई आयोग का गठन किया. सबसे बड़ा काम उन्होंने बिना पर्ची बिना खर्ची की नीति पर मिशन मेरिट के आधार पर नौकरियां देने का काम किया.
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