Manipur: PLA के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, नंबोल हमले में शामिल 15 उग्रवादी गिरफ्तार

Manipur News: मणिपुर घाटी में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के खिलाफ सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए नंबोल हमले में शामिल 15 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है.

Manipur Major action against PLA 15 militants involved in Nambol attack arrested
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Manipur News: मणिपुर घाटी में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के खिलाफ सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए नंबोल हमले में शामिल 15 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. यह वही हमला है जिसमें 19 सितंबर को असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया था और दो जवान शहीद हो गए थे.

गिरफ्तार किए गए उग्रवादियों में दो प्रमुख नाम सामने आए हैं, ठौंगराम सदानंद सिंह उर्फ पुरकपा (18 वर्ष) और खोंद्राम ओजित सिंह उर्फ केइलाल (47 वर्ष). इन दोनों को महज 72 घंटे के भीतर पकड़ लिया गया, जो सुरक्षा बलों की तेज़ कार्रवाई का संकेत है. खास बात यह है कि सदानंद पहले यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) का सदस्य रह चुका है और हाल ही में पीएलए में शामिल हुआ था.

हथियारों की बरामदगी से खुली बड़ी साजिश

जांच के दौरान जो हथियार बरामद हुए हैं, उनमें से छह पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए थे. इससे यह स्पष्ट होता है कि जातीय हिंसा के दौरान हथियार उग्रवादी समूहों के हाथ लग चुके हैं. हमले में इस्तेमाल हुई एक वैन भी घटनास्थल से करीब 12 किलोमीटर दूर मूतुम यांगबी से बरामद हुई है, जिससे हमले की योजनाबद्धता जाहिर होती है.

हमले की जिम्मेदारी से पीएलए का इनकार, फिर भी शक गहराया

पीएलए ने इस हमले की कोई जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि यह संगठन आमतौर पर हर कार्रवाई की जिम्मेदारी लेता रहा है. ऐसे में खुफिया एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या हमले के पीछे राजनीतिक मंशा भी छिपी हुई है? क्या यह राष्ट्रपति शासन को कमजोर करने या विधानसभा की बहाली का दबाव बनाने की कोशिश है?

क्या राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं उग्रवादी?

सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि कहीं PLA को किसी राजनीतिक समूह या स्थानीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ उग्रवादी संगठन जनता के बीच यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि वर्तमान प्रशासन विफल है और राज्य में निर्वाचित सरकार की बहाली जरूरी है.

संवेदनशील समय में गंभीर चुनौती

यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब मणिपुर जातीय हिंसा से जूझ रहा है और केंद्र सरकार ने शांति बहाल करने के लिए कई उग्रवादी संगठनों के साथ समझौते किए हैं. UNLF जैसे बड़े संगठन ने हाल ही में युद्धविराम की घोषणा की थी और 24 कुकी समूह पहले से ही “ऑपरेशन सस्पेंशन” समझौते में शामिल हैं. इस हमले से शांति प्रक्रिया को गहरा झटका लग सकता है.

राज्यपाल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक

हमले के बाद राज्यपाल अजय भल्ला ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने, मुख्य मार्गों की सुरक्षा बढ़ाने और दोषियों को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए गए.

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