Operation Herof 2.0: बलोचिस्तान एक बार फिर बड़े पैमाने पर हुए हमलों और लगातार तेज होते विद्रोह की वजह से चर्चा में है. बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन “हेरोफ 2.0” ने पाकिस्तान की सेना और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को गंभीर चुनौती दी है.
रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के तहत एक साथ कई शहरों और संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाया गया, जहां सुरक्षा चौकियों पर कब्जे की कोशिशें हुईं और कई स्थानों पर सुरक्षा बलों को पीछे हटना पड़ा. इन समन्वित हमलों ने यह संकेत दिया है कि विद्रोही संगठन अब पहले से कहीं अधिक संगठित और रणनीतिक रूप से सक्रिय हो चुके हैं.
तीन यूनिट्स की संयुक्त कार्रवाई
ऑपरेशन हेरोफ 2.0 में BLA की तीन प्रमुख इकाइयों ने मिलकर कार्रवाई की. इनमें मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और STOS शामिल हैं. इन तीनों यूनिट्स की भूमिकाएं अलग-अलग रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा और चिंता मजीद ब्रिगेड को लेकर सामने आई है. यह यूनिट आत्मघाती हमलों और हाई-प्रोफाइल टारगेट्स पर हमले करने के लिए जानी जाती है, जिसकी वजह से पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है.
मजीद ब्रिगेड: BLA की सबसे आक्रामक इकाई
मजीद ब्रिगेड को BLA की “स्पेशल फोर्स यूनिट” के रूप में देखा जाता है. इसकी पहचान उच्च जोखिम वाले आत्मघाती अभियानों से जुड़ी हुई है. पिछले एक दशक में पाकिस्तान के कई संवेदनशील ठिकानों पर हुए बड़े हमलों के पीछे इस यूनिट की भूमिका बताई जाती रही है. कराची स्टॉक एक्सचेंज पर 2020 में हुआ हमला और 2024 में कराची एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किया गया आत्मघाती हमला, उन घटनाओं में शामिल हैं जिनसे मजीद ब्रिगेड की गतिविधियों की गंभीरता उजागर हुई. इन हमलों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी.
मजीद ब्रिगेड का गठन और पृष्ठभूमि
मजीद ब्रिगेड की स्थापना 2010-2011 के बीच BLA के पूर्व नेता असलम अचू के नेतृत्व में की गई थी. इस यूनिट का नाम दो भाइयों, मजीद लंगोव सीनियर और मजीद लंगोव जूनियर के नाम पर रखा गया. मजीद लंगोव सीनियर 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर हुए हमले के प्रयास के दौरान मारे गए थे, जबकि मजीद लंगोव जूनियर 2010 में सुरक्षा बलों के एक ऑपरेशन में मारे गए. इन दोनों के नाम पर बनाई गई यह इकाई समय के साथ BLA की सबसे आक्रामक और हाई-प्रोफाइल हमलों को अंजाम देने वाली शाखा बन गई.
ऑपरेशन हेरोफ 2.0 में मजीद ब्रिगेड की निर्णायक भूमिका
ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के दौरान मजीद ब्रिगेड की भूमिका सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है. इस अभियान में शामिल आत्मघाती हमलावरों में महिलाओं की भागीदारी भी सामने आई है. हवा बलोच और असिफा मेंगल जैसी महिला फिदायीन के बारे में बताया गया है कि उन्होंने ग्वादर और नुश्की में ISI और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) से जुड़े ठिकानों पर वाहन-आधारित विस्फोटक (VBIED) हमले किए. BLA की ओर से जारी बयान के अनुसार, इस ऑपरेशन में संगठन के कुल 18 लड़ाके मारे गए, जिनमें से 11 मजीद ब्रिगेड से जुड़े फिदायीन थे. इससे यह संकेत मिलता है कि इस पूरे अभियान की रीढ़ यही यूनिट रही.
बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका की कार्रवाई
मजीद ब्रिगेड और BLA की गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है. वर्ष 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने BLA और मजीद ब्रिगेड दोनों को औपचारिक रूप से “Foreign Terrorist Organization (FTO)” घोषित किया. इस कदम के बाद इन संगठनों की गतिविधियों पर वैश्विक निगरानी और दबाव और तेज हो गया है. कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है.
बलोचिस्तान में सुरक्षा चुनौतियां और भविष्य की स्थिति
ऑपरेशन हेरोफ 2.0 जैसे समन्वित हमले यह दिखाते हैं कि बलोचिस्तान में सुरक्षा स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है. एक ओर विद्रोही संगठन अपनी रणनीतियों को अधिक आक्रामक और संगठित बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों के सामने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और सुरक्षा बल इस बढ़ती हिंसा से निपटने के लिए कौन-से कदम उठाते हैं और क्या राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल होती है.
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