अब गाली देने वालों की खैर नहीं! लगाया जाएगा तगड़ा जुर्माना, MP के इस गांव में बना अजब-गजब नियम

Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव आजकल एक अनोखी पहल के लिए चर्चा में है. इस गांव को गाली-मुक्त गांव घोषित किया गया है, जहां अब कोई भी व्यक्ति गाली-गलौज का इस्तेमाल नहीं करता.

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Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव आजकल एक अनोखी पहल के लिए चर्चा में है. इस गांव को गाली-मुक्त गांव घोषित किया गया है, जहां अब कोई भी व्यक्ति गाली-गलौज का इस्तेमाल नहीं करता. यह पहल ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. बोरसर गांव की यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे जिले में एक सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर उभरी है.

गाली देने पर सख्त जुर्माना और सजा

बोरसर गांव में गाली देना अब एक अपराध माना जाता है. इस गांव में करीब 6000 की आबादी है और पंचायत ने गाली देने पर सख्त नियम बनाए हैं. अगर कोई व्यक्ति गाली देते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है. यदि जुर्माना भरने की स्थिति नहीं है, तो दोषी को गांव में एक घंटे तक साफ-सफाई का काम करना होता है. यह नियम लोगों को गाली-गलौज से बचने के लिए प्रेरित करता है और गांव में एक सकारात्मक माहौल बनाता है.

सभी ग्रामीणों की सहमति से लागू हुआ नियम

यह गाली-मुक्त नियम गांव के लोगों की सहमति से लागू किया गया है. ग्राम पंचायत ने गांव के विभिन्न स्थानों पर पोस्टर लगाकर गाली देना मना है का संदेश दिया. इसके अलावा, मुनादी कराकर भी लोगों को इस नियम के बारे में बताया गया. ग्रामीणों ने इस नियम को सकारात्मक रूप से अपनाया और अब यह पूरी तरह से लागू हो चुका है. गांव में अब किसी भी व्यक्ति को गाली देने की अनुमति नहीं है, और यह एक सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा बन चुका है.

टीवी कलाकार अश्विन पाटील की पहल

इस अनोखी पहल की शुरुआत बोरसर गांव के ही निवासी और टीवी कलाकार अश्विन पाटील ने की. अश्विन ने बताया कि गांव में गंदगी और गाली-गलौज की आदत से परेशान होकर पहले सफाई अभियान शुरू किया था. इसके बाद, उन्होंने गाली-गलौज पर नियंत्रण के लिए पंचायत को सुझाव दिया. अश्विन पाटील की पहल को सरपंच और उपसरपंच ने समर्थन दिया, और इस प्रकार पूरे गांव में यह मुहिम शुरू हो गई.

बुरहानपुर जिले में सराहना

बोरसर गांव की इस पहल को केवल गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे बुरहानपुर जिले में भी सराहा जा रहा है. सरपंच विनोद शिंदे ने कहा कि यह बदलाव केवल पंचायत के प्रयास से नहीं, बल्कि सभी ग्रामीणों के सहयोग से संभव हो पाया है. अब बोरसर गांव एक सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन गया है. यह पहल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, और यदि अन्य गांवों ने भी इस मॉडल को अपनाया, तो समाज में बड़े स्तर पर बदलाव देखा जा सकता है.

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