'व्यक्ति का अहंकार उसे कहां तक गिरा सकता है', जानें क्या कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

Kya Kehte Hai Narendra Modi: हम आपको बताएंगे पीएम मोदी के उस ऐतिहासिक भाषण के बारे में जो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से पहले 2013 में गुजरात में दिया था.

'व्यक्ति का अहंकार उसे कहां तक गिरा सकता है', जानें क्या कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

नई दिल्ली, न्यूज डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) में कई ऐसी खूबियां हैं, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती हैं. उनके काम को हर कोई पसंद करता है साथ ही पीएम जिस तरीके से अपनी बात को जनता के सामने रखते हैं उस अंदाज की पूरी दुनिया कायल है. आज भारत 24 के स्पेशल प्रोग्राम में हम आपको पीएम मोदी के उस ऐतिहासिक भाषण के बारे में बताएंगे जो उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से पहले 2013 में गुजरात में दिया था. 

व्यक्ति का अहंकार उसे कहां तक गिरा सकता?

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए आप जिस माहौल में रहते हैं वहां खुशियां होनी चाहिए. अगर आपके आस-पास खुशियों का माहौल नहीं है तो आप कभी भी ना खुश रह सकते हैं और ना खुशियां बांट सकते हैं.' पीएम ने कहा 'ज्ञान कितना भरपूर क्यों ना हो... सत्ता कितनी विशाल क्यों ना हो संपत्ति खूब क्यों ना हो लेकिन संस्कार नहीं होंगे तो ये सब विनाश होगा. व्यक्ति का अहंकार उसे कहां तक गिरा सकता है. सत्ता, संपत्ति और ज्ञान अगर संस्कारों के साथ जुड़ जाए तो ये सब कुछ नाश हो जाएगा और रावण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. 

'रावण के विनाश से सीख मिल सकती है'

साल 2013 में विजयादशमी के पर्व पर पीएम मोदी ने कहा- 'हमे अगर कुछ सिखना है और समझना है तो जिनता राम की विजय, राम के आदर्शों के साथ जुड़ी हुई सीख है उससे हर कोई परिचित है. अपने परिवार में बच्चों, दोस्तों को श्री राम का ही उदाहरण दिया जाता है. लेकिन कभी-कभी रावण के विनाश से भी सीख मिलती है. कभी बुरी घटनाएं भी अच्छा बनने का अवसर देती है. हमारे जीवन में अनेक बारे ऐसी घटनाएं घटती है जिसके कारण हमें बाद में लगता है कि अच्छा होता अगर ऐसा ना होता.' पीएम ने आगे कहा- 'जीवन में अच्छा करने के लिए बहुत समय लगता है, अविरत साधना करनी पड़ती है. सीखने के लिए अपने आप को पूरी तरह तैयार रखना पड़ता है. तब जाकर कोई बड़ा योद्धा बनता है.

जीवन में कुछ पाने के लिए क्या करें?

पीएम मोदी ने कहा- 'जीवन में कुछ पाने के लिए अपने मन मंदिर में, बुद्धि में, विचार प्रक्रिया में, शरीर में, स्वाभवा में कोई भी चीज इतनी आसानी से नहीं आती है. उसके लिए खूब परिश्रम करना पड़ता है. साधना करनी पड़ती है. अगर शूटिंग में जीतना है तो उसके लिए आवश्यक हर एक चीज करनी पड़ती है. काम भले ही छोटा हो लेकिन करते-करते सालों लग जाते हैं. लेकिन विनाश के लिए एक पल काफी होता है. एक छोटी सी गलती इंसान को कहां से कहां लाकर खड़ा कर देती है. इसलिए प्रभु राम का स्मरण करते हुए अपने जीवन में विजय की कामना करें. आज जहां हैं वहां से आगे बढ़ने का संकल्प लें.'