उसे बचा लो अभी उसकी जिंदगी शुरू हुई है... किश्तवाड़ हादसे पर पीड़ितों का छलका दर्द; अब तक 46 की हुई मौत

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को एक भयंकर प्राकृतिक आपदा ने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी. चशोती इलाके में अचानक बादल फटने से आई बाढ़ में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दो CISF जवान भी शामिल हैं.

उसे बचा लो अभी उसकी जिंदगी शुरू हुई है... किश्तवाड़ हादसे पर पीड़ितों का छलका दर्द; अब तक 46 की हुई मौत
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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को एक भयंकर प्राकृतिक आपदा ने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी. चशोती इलाके में अचानक बादल फटने से आई बाढ़ में अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दो CISF जवान भी शामिल हैं. इसके अलावा लगभग 200 लोग लापता बताए जा रहे हैं.

यह घटना विशेष रूप से मचैल माता मंदिर यात्रा मार्ग पर हुई, जहाँ दो मिनट के भीतर पत्थरों और मलबे का सैलाब आने से श्रद्धालु फंस गए. जो जहां था, वहीं दब गया या फंस गया. इस दौरान लोगों के पास कुछ सोचने या बचने का समय नहीं था.

रेस्क्यू और राहत कार्य

पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है. आपदा प्रबंधन टीमों ने मंदिर के पास से कई लोगों को सुरक्षित निकाला. घायल लोगों की संख्या 100 है, जिनमें से 37 की हालत गंभीर है.घायलों को किश्तवाड़ जिला अस्पताल और पड्डार उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटनास्थल से बड़े पत्थर, उखड़े पेड़ और बिजली के खंभे हटाने के लिए खुदाई मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

मचैल माता मंदिर और यात्रा की जानकारी

मचैल माता मंदिर 9500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. श्रद्धालु चशोती गांव तक मोटर वाहन से पहुँच सकते हैं, उसके बाद 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है. यह यात्रा 25 जुलाई से शुरू हुई थी और 5 सितंबर तक चलनी थी. मंदिर जाने के रास्ते में लंगर और सामुदायिक रसोईघर भी प्रभावित हुए. बाढ़ के कारण 16 आवासीय घर, सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पवन चक्कियां, 30 मीटर लंबा पुल और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए.

प्रशासन और राहत कार्य

किश्तवाड़ के एडिशनल एसपी प्रदीप सिंह ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. बचाव अभियान सुबह से जारी है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए सर्च लाइट, रस्सियाँ और खुदाई के औज़ार मुहैया कराए जा रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया. राहत कार्य में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, सेना और स्थानीय वॉलंटियर्स शामिल हैं.

राजनीतिक और सांस्कृतिक असर

इस त्रासदी के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 अगस्त को होने वाली एट होम चाय पार्टी और स्वतंत्रता दिवस समारोहों को रद्द कर दिया है. यह आपदा न केवल किश्तवाड़ के लोगों के लिए एक बड़ी मानविक चुनौती है, बल्कि प्रशासन और बचाव टीमों के लिए भी अत्यंत कठिन परिस्थितियाँ पेश कर रही है. राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और लोगों की सुरक्षा के लिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

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