इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान, के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर हाई अलर्ट पर हैं और कूटनीतिक संबंध लगभग जमी हुई स्थिति में हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान के साथ हालात बेहद गंभीर और टकराव की कगार पर हैं. उन्होंने संकेत दिया कि अगर हालात नहीं संभले, तो सीमा पर सैन्य संघर्ष कभी भी शुरू हो सकता है.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि फिलहाल भले ही सीमापार कोई सक्रिय लड़ाई नहीं हो रही हो, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में जबरदस्त गिरावट आई है. उन्होंने दो टूक कहा, “हम संघर्ष की संभावना को पूरी तरह नकार नहीं सकते. यदि अफगानिस्तान की ओर से कोई उकसावा होता है, तो पाकिस्तान को तुरंत जवाब देने का अधिकार है.”
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में सीमा पर कई सैन्य झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें दर्जनों सैनिकों के मारे जाने के दावे दोनों देशों द्वारा किए जा रहे हैं.
TTP पर हवाई हमलों से शुरू हुआ विवाद
तनाव की शुरुआत 9 अक्टूबर को हुई जब अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पास स्थित इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले हुए. तालिबान प्रशासन का दावा है कि ये हमले पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किए गए, जबकि पाकिस्तान ने इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी.
इन हमलों के जवाब में 11 अक्टूबर को अफगान सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की 25 सैन्य चौकियों पर हमला किया. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक गहराता गया.
सीमा पर झड़प और सैनिकों की मौत
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि अफगान सेना ने सीमा पर की गई सैन्य कार्रवाई में 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, और साथ ही पाकिस्तान की 25 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया.
इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने कहा कि झड़प में उनके 25 सैनिक शहीद हुए, लेकिन उन्होंने 200 तालिबानी लड़ाकों को मार गिराया और बड़ी संख्या में सैन्य उपकरण नष्ट किए.
इस पूरे घटनाक्रम के चलते सीमा पर व्यापार, आम नागरिकों की आवाजाही, और कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह बंद हो गए हैं.
पाकिस्तान का सिरदर्द बना TTP
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) एक कट्टरपंथी संगठन है, जिसकी स्थापना 2007 में बेतुल्लाह मेहसूद ने की थी. यह संगठन कई छोटे-छोटे इस्लामी आतंकी समूहों को मिलाकर बनाया गया था. TTP का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ संघर्ष करना है.
TTP का इतिहास:
2021 के बाद से बढ़ा तनाव
अफगानिस्तान में जब तालिबान ने 2021 में सत्ता पर कब्जा किया, तब से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंधों में तनाव बढ़ने लगा. तालिबान के सत्ता में आने के बाद, पाकिस्तान ने TTP के खिलाफ सीमा पार हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास का संकट गहरा गया.
अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तान अपनी समस्याओं के लिए हमेशा काबुल को दोषी ठहराता है, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान प्रशासन TTP को पनाह और समर्थन दे रहा है.
डूरंड लाइन: विवाद का ऐतिहासिक कारण
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की जड़ डूरंड लाइन है, जो कि 1893 में ब्रिटिश शासकों द्वारा खींची गई थी. अफगानिस्तान कभी भी इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता. वहीं पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है.
इस सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच अतीत में कई बार सैन्य झड़पें, सीमा पर गोलीबारी और नागरिक मौतें हो चुकी हैं. डूरंड लाइन आज भी सामरिक और राजनीतिक रूप से विवादित क्षेत्र बना हुआ है.
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