नई दिल्ली: फ्रांस की सेना ने भारत के स्वदेशी सैन्य उपकरणों और तकनीकी क्षमताओं में गहरी दिलचस्पी दिखाई है. हाल ही में भारत में हुए "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान भारतीय हथियारों की सटीकता और प्रभावशीलता ने फ्रांसीसी सैन्य नेतृत्व को काफी प्रभावित किया है. अब फ्रांस इन हथियारों को खरीदने के साथ-साथ कुछ प्रणालियों के संयुक्त निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाना चाहता है.
फ्रांसीसी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल पियरे शिल इस समय भारत की यात्रा पर हैं. वह उन अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं जो संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान देने वाले देशों की सैन्य नेतृत्व की एक उच्च-स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं. अपने दौरे के दौरान जनरल शिल ने भारतीय सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया.
फ्रांसीसी सेना की भारतीय हथियारों में रुचि
जनरल शिल ने भारतीय रक्षा उद्योग के कुछ प्रमुख हथियार प्रणालियों में अपनी विशेष रुचि व्यक्त की है. उन्होंने यह बताया कि फ्रांस इस समय अपनी लंबी दूरी की तोपों और रॉकेट प्रणालियों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है और वह यह जानने को उत्सुक हैं कि भारतीय सेना किन हथियारों का उपयोग करती है.
विशेष रूप से, फ्रांसीसी सेना स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, लोइटरिंग म्यूनिशन (घूमता हुआ आत्मघाती ड्रोन), और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी में गहरी रुचि ले रही है. इन प्रणालियों को भारतीय सेना ने हाल के अभियानों में सफलतापूर्वक तैनात किया है और उनकी लागत-प्रभावशीलता तथा कार्यक्षमता की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है.
ऑपरेशन सिंदूर: एक निर्णायक मोड़
फ्रांसीसी जनरल ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाल ही में आयोजित ऑपरेशन सिंदूर ने उनकी सोच को बदल दिया. इस सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना ने स्वदेशी हथियारों और तकनीकों का बेहद सटीक और प्रभावशाली उपयोग किया. जनरल शिल ने माना कि उन्होंने भारतीय सैनिकों को न केवल अत्याधुनिक उपकरणों के साथ देखा, बल्कि उन्हें इनका कुशल संचालन करते हुए भी अनुभव किया.
संयुक्त रक्षा उत्पादन की संभावनाएं
फ्रांस अब भारत के साथ न केवल हथियार खरीदने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, बल्कि संयुक्त निर्माण और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है. जनरल शिल ने यह भी संकेत दिए कि फ्रांसीसी और भारतीय रक्षा उद्योगों के बीच को-डिवेलपमेंट मॉडल को भी अपनाया जा सकता है, ताकि दोनों देशों को तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक ताकत मिले.
AI, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और प्रशिक्षण
दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में परंपरागत युद्ध के साथ-साथ आधुनिक युद्ध की तकनीकों पर भी चर्चा हुई. जनरल शिल ने कहा कि वे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर युद्ध प्रणाली में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "शायद इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और AI वे क्षेत्र हैं जहां दोनों सेनाएं मिलकर बहुत कुछ कर सकती हैं, क्योंकि दोनों की क्षमताएं अत्यधिक प्रभावशाली हैं."
फ्रांस, भारत के साथ ड्रोन-विरोधी प्रणालियों (Counter-Drone Systems) के प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास को भी बढ़ावा देना चाहता है. इसके अलावा, दोनों देशों के बीच "शक्ति" नामक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास को और अधिक गहराई देने की योजना पर भी काम हो रहा है. इसमें अब UAV (Unmanned Aerial Vehicle) प्रशिक्षण, AI-सक्षम निगरानी प्रणालियां, और साइबर ऑपरेशंस को भी शामिल किया जाएगा.
पिनाका रॉकेट सिस्टम: आकर्षण का केंद्र
फ्रांसीसी जनरल की टिप्पणी से यह संकेत मिला है कि वह विशेष रूप से पिनाका रॉकेट सिस्टम को लेकर उत्साहित हैं. पिनाका, जिसे DRDO और भारतीय कंपनियों ने मिलकर विकसित किया है, अपनी लंबी रेंज, उच्च मारक क्षमता और कम लागत की वजह से अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बेहतरीन विकल्प बन चुका है. फ्रांस ने इससे पहले भी इस सिस्टम में रुचि दिखाई थी और हाल ही में हुए प्रदर्शन से वह और अधिक प्रभावित हुआ है.
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