Kajari Teej Vrat Rules: कजरी तीज सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं. साल 2026 में कजरी तीज का पर्व 31 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा. अगर आप भी इस व्रत की तैयारी कर रही हैं, तो पूजा की विधि और जरूरी नियमों को पहले से जान लेना बेहतर रहेगा, ताकि किसी तरह की गलती न हो और श्रद्धा के साथ व्रत पूरा किया जा सके.
अखंड सौभाग्य के लिए इन बातों का रखें ध्यान
कजरी तीज के दिन महिलाओं को लाल या हरे रंग के वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करने की परंपरा बताई गई है. पूजा के बाद सास या घर की किसी बुजुर्ग महिला को बयाना यानी सुहाग सामग्री देकर उनका आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी सुहागिन महिला को वस्त्र और सुहाग सामग्री का दान भी किया जा सकता है. इस दिन नीमड़ी माता की कथा सुनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कथा श्रवण और चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत को पूर्ण माना जाता है.
पूजा के दौरान इन कामों से बचें
व्रत के दिन कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए. पूजा के दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचने की मान्यता है. साथ ही किसी से विवाद, क्रोध या अनादर करने से भी बचना चाहिए और पूरे दिन मन को शांत रखने का प्रयास करना चाहिए. कजरी तीज का व्रत परंपरागत रूप से निर्जला रखा जाता है, इसलिए पारण से पहले पानी पीने से बचने की मान्यता है. हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी स्थिति के अनुसार फलाहार या अन्य उचित विकल्प अपनाया जा सकता है.
चंद्र दर्शन के बाद ही करें व्रत का पारण
कजरी तीज के दिन दिन में सोने के बजाय भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ में समय बिताना शुभ माना जाता है. रात में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद उन्हें विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित किया जाता है और इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है. कथा सुनने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत संपन्न करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ किया गया यह व्रत दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार में समृद्धि का आशीर्वाद लाता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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