Yemen Strike: मध्य पूर्व एक बार फिर आग की लपटों में घिर गया है. युद्ध से पहले ही झुलस रहे यमन पर अब एक साथ तीन देशों, इजराइल, अमेरिका और सऊदी अरब ने हमला किया है.
इन हमलों का निशाना हूती विद्रोही संगठन और अलकायदा नेटवर्क बताया जा रहा है. यह वही समय है जब हूती और अलकायदा ने हाल ही में एक अप्रत्याशित गठबंधन की घोषणा की थी, जिसने क्षेत्रीय शक्तियों को चौकन्ना कर दिया है.
यमन पर तीन तरफ से हमला
इजराइल का पहला हमला: सना में ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक
इजराइल ने यमन की राजधानी सना और उत्तरी प्रांतों में कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल की यह कार्रवाई हूती विद्रोहियों के कमांड हेडक्वार्टर और प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाकर की गई. इजराइली खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि इस हमले में हूती संगठन के शीर्ष सैन्य कमांडर अल-लघारी मारे गए हैं. यही अल-लघारी हाल के महीनों में इजराइल के खिलाफ कई रॉकेट और ड्रोन हमलों की योजना बना रहे थे.
हूती गुट ने इजराइल के खिलाफ “जिहाद का युद्ध” घोषित कर रखा है. इजराइल की ओर से यह हमला उनके खिलाफ “प्रतिकार अभियान” के तहत किया गया बताया जा रहा है. यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 50 से अधिक हूती लड़ाके और 600 से ज्यादा आम नागरिक इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं. हूती प्रशासन ने पूरे देश में रेड अलर्ट जारी कर दिया है और अपने समर्थकों से लामबंदी की अपील की है.
सऊदी अरब की कार्रवाई: सादा प्रांत में हवाई हमले
इजराइल के हमले के कुछ घंटों बाद ही सऊदी अरब ने भी यमन के सादा प्रांत पर हवाई हमला किया. यह इलाका हूती विद्रोहियों का गढ़ माना जाता है और कई वर्षों से सऊदी सीमा के लिए खतरा बना हुआ है.
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सऊदी सेना ने रजीह सीमा जिले में मिसाइल और तोपखाने से हमला किया. हालांकि सऊदी सरकार ने इसे “आत्मरक्षा की कार्रवाई” बताया है, लेकिन यमन के स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया गया. अब तक हताहतों की सटीक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई घर और सरकारी इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं.
अमेरिकी ड्रोन अटैक: अलकायदा कमांडर मारा गया
तीसरा हमला अमेरिका की ओर से किया गया. “यमन मॉनिटर” की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी फोर्सेज ने ड्रोन स्ट्राइक के जरिए अलकायदा के वरिष्ठ कमांडर अबू मुहम्मद अल-सनानी को निशाना बनाया.
यह हमला यमन के दक्षिणी हिस्से में हुआ, जहां अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (AQAP) के कई कैंप सक्रिय बताए जाते हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह ऑपरेशन “आतंकवाद विरोधी रणनीति” का हिस्सा है और इसका उद्देश्य उन नेटवर्क्स को समाप्त करना है जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले की योजना बना रहे हैं.
यमन की भू-राजनीतिक स्थिति क्यों अहम है
यमन, अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है और रेड सी (लाल सागर) तथा गुल्फ ऑफ एडन के बीच एक रणनीतिक स्थिति रखता है. यही रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
यमन में बीते कई वर्षों से गृहयुद्ध चल रहा है, जिसमें एक तरफ ईरान समर्थित हूती विद्रोही हैं और दूसरी तरफ सऊदी अरब समर्थित सरकारी बल. इसी बीच, यमन में अलकायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला (AQAP) भी सक्रिय है, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी नेटवर्क्स में गिना जाता है.
हूती और अलकायदा का नया गठबंधन
हाल ही में यमन से एक चौंकाने वाली खबर आई थी कि हूती विद्रोही और अलकायदा के बीच एक सामरिक गठबंधन (Strategic Alliance) बन चुका है. यह गठबंधन अमेरिका, सऊदी अरब और इजराइल, तीनों के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन के पीछे ईरान की भूमिका हो सकती है, जो पहले से ही हूतियों को हथियार, ड्रोन और वित्तीय सहायता देता रहा है. अगर हूती और अलकायदा मिलकर काम करते हैं, तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा.
सऊदी अरब की चिंताएं
सऊदी अरब लंबे समय से यमन से आने वाले हूती हमलों से परेशान है. पिछले कुछ सालों में हूतियों ने सऊदी तेल ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं, जिनसे अरब की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ. इसलिए सऊदी अब किसी भी कीमत पर हूतियों की ताकत को खत्म करना चाहता है.
इजराइल की भूमिका और रणनीति
हमास और हिज़बुल्लाह के बाद अब इजराइल हूती विद्रोहियों को “ईरान का तीसरा मोर्चा” मानता है. इजराइली इंटेलिजेंस के अनुसार, हूती संगठन ईरान से मिलने वाले हथियारों का इस्तेमाल रेड सी में इजराइली जहाजों पर हमले के लिए कर रहा है. इसी कारण, इजराइल ने यमन में अपने सैन्य अभियानों को तेज कर दिया है.
अमेरिका का हस्तक्षेप
अमेरिका लंबे समय से सऊदी अरब और इजराइल दोनों का सुरक्षा सहयोगी रहा है. वॉशिंगटन का मानना है कि हूती और अलकायदा का गठबंधन वैश्विक आतंकवाद के लिए नया खतरा है. इसी वजह से अमेरिका ने सीधे तौर पर यमन में ड्रोन ऑपरेशन शुरू कर दिया है. अमेरिकी रक्षा सूत्रों के मुताबिक, “यमन में अब एक ‘तीसरा मोर्चा’ खुल गया है, जहां आतंकवाद, प्रॉक्सी वॉर और सामरिक हित आपस में टकरा रहे हैं.”
यमन की मौजूदा स्थिति
तीनों देशों के हमलों के बाद यमन के कई हिस्सों में इंटरनेट और बिजली सेवाएं ठप हो गई हैं. राजधानी सना में हवाई हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है कि “अगर यह संघर्ष जारी रहा तो लाखों यमनी नागरिकों के लिए मानवीय संकट गहराएगा.”
विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यमन अब “प्रॉक्सी वारफेयर का नया केंद्र” बन गया है. जहां एक ओर ईरान अपने सहयोगी गुटों को सक्रिय कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका, सऊदी और इजराइल संयुक्त रूप से उसके खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. अगर यह संघर्ष आगे बढ़ता है, तो इसका असर न सिर्फ अरब प्रायद्वीप बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ेगा.
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