Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जनवरी को बोर्ड ऑफ पीस के गठन की घोषणा की थी. इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा में शांति बहाल करना, क्षेत्र का पुनर्निर्माण करना और नई शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना बताया गया. हालांकि सामने आए ड्राफ्ट चार्टर और नियमों से यह स्पष्ट हो गया है कि यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में दुनिया के अन्य संघर्षों में भी इसकी भूमिका हो सकती है.
ट्रंप ने इस बोर्ड को औपचारिक रूप से लॉन्च करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है. इसके लिए उन्होंने 58 देशों के नेताओं को न्योता भेजा है, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं. हालांकि यूरोप के कई देश इस पहल को लेकर असहज हैं और फ्रांस ने फिलहाल बोर्ड में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया है.
ड्राफ्ट चार्टर में महत्वपूर्ण शर्तें
व्हाइट हाउस द्वारा जारी ड्राफ्ट चार्टर के अनुसार, ट्रंप इस बोर्ड के पहले चेयरमैन होंगे और उन्हें हर फैसले पर वीटो पावर प्राप्त होगी. इसका मतलब यह है कि भले ही सभी सदस्य देशों के पास एक-एक वोट होगा और फैसले बहुमत से लिए जाएंगे, लेकिन अंतिम मंजूरी केवल ट्रंप के हाथ में होगी.
चार्टर में सदस्यता की सामान्य अवधि तीन साल तय की गई है, जिसे चेयरमैन की इच्छा से बढ़ाया जा सकता है. स्थायी सदस्यता उन्हीं देशों को दी जाएगी, जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं. हालांकि, इस प्रतिबद्धता को मापने के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट मापदंड नहीं बताए गए हैं.
विशेष आर्थिक योगदान का महत्व
चार्टर में आर्थिक योगदान के आधार पर विशेष व्यवस्था भी बताई गई है. अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में 1 अरब डॉलर यानी लगभग 9,087 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद योगदान करता है, तो उस पर तीन साल की सदस्यता सीमा लागू नहीं होगी. इसका मतलब यह है कि ज्यादा योगदान देने वाले देशों को लंबी अवधि या स्थायी सदस्यता दी जा सकती है. हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम फीस अनिवार्य नहीं है.
ट्रंप की सोच और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर सवाल
ड्राफ्ट चार्टर की प्रस्तावना में यह उल्लेख किया गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कई बार असफल रही हैं. इसलिए अब ऐसी संस्था की जरूरत है जो तेजी से और व्यावहारिक निर्णय ले सके. यह ट्रंप की उसी सोच से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को अक्सर सुस्त और कम प्रभावशाली बताया है. इस पहल के माध्यम से ट्रंप तेज़ निर्णय लेने वाली संस्था बनाने की योजना रखते हैं.
बोर्ड के शुरुआती सदस्य और वैश्विक हस्तियां
व्हाइट हाउस ने बोर्ड की एग्जीक्यूटिव टीम के शुरुआती सात सदस्यों के नाम भी जारी किए हैं. इनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के प्रमुख अजय बंगा और अन्य वरिष्ठ वैश्विक हस्तियां शामिल हैं. इस टीम को बोर्ड की संचालन और रणनीतिक निर्णयों में अहम भूमिका निभाने के लिए चुना गया है.
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