कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा की जैस्मीन लंबोरिया का गोल्डन पंच! चैंपियन को 5-0 से हराकर रचा इतिहास

हरियाणा की स्टार मुक्केबाज जैस्मीन लंबोरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का खिताब जीतकर यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर की सबसे भरोसेमंद भारतीय मुक्केबाजों में शामिल हैं.

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भारतीय मुक्केबाजी के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 बेहद यादगार साबित हो रहे हैं. महिला बॉक्सरों ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज के साथ रिंग में अपना दबदबा बनाया, उसने भारत के पदकों की झोली को लगातार भरने का काम किया. 

इसी कड़ी में हरियाणा की स्टार मुक्केबाज जैस्मीन लंबोरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का खिताब जीतकर यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर की सबसे भरोसेमंद भारतीय मुक्केबाजों में शामिल हैं.

मिकेला वॉल्श को 5-0 से हराया

शनिवार, 1 अगस्त को खेले गए फाइनल मुकाबले में जैस्मीन लंबोरिया का सामना नॉर्दर्न आयरलैंड की मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन मिकेला वॉल्श से हुआ. भारतीय मुक्केबाज ने शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा और अपने तेज पंचों व शानदार डिफेंस के दम पर जजों का पूरा समर्थन हासिल किया. 

परिणामस्वरूप उन्होंने एकतरफा अंदाज में 5-0 से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल पर कब्जा कर लिया. इससे पहले 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने भारत के लिए पहला बॉक्सिंग गोल्ड जीतकर अभियान की शानदार शुरुआत की थी, जबकि जैस्मीन ने दूसरा स्वर्ण जीतकर भारतीय मुक्केबाजी की ताकत को और मजबूत किया.

यूके की धरती फिर बनी जैस्मीन के लिए लकी

भिवानी की 24 वर्षीय जैस्मीन लंबोरिया का अंतरराष्ट्रीय सफर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. यूनाइटेड किंगडम की धरती उनके लिए हमेशा सफलता लेकर आई है. बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई थी. इसके बाद 2025 में इंग्लैंड के लिवरपूल में आयोजित विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर वह वर्ल्ड चैंपियन बनीं. 

अब स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है. ब्रॉन्ज से गोल्ड तक का यह सफर उनकी मेहनत, निरंतर सुधार और बड़े मुकाबलों में दमदार प्रदर्शन का सबसे बड़ा प्रमाण बन गया है.

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