जो भी बनेगा, उसे नहीं बख्शेंगे... ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई पर इजराइल की सख्त चेतावनी

Israel Vs Iran: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब खुले संघर्ष का रूप ले चुका है और पिछले कई दिनों से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. इसी बीच ईरान की सत्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है.

Israel strict warning on Iran new Supreme Leader Mojtaba Khamenei know what was said
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Israel Vs Iran: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब खुले संघर्ष का रूप ले चुका है और पिछले कई दिनों से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. इसी बीच ईरान की सत्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नए सुप्रीम लीडर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सूत्रों के अनुसार, उनके बेटे मोज्तबा खामेनेई को इस पद के लिए चुना गया है, हालांकि ईरान की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

बताया जा रहा है कि तेहरान में मौजूद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने 56 वर्षीय मोज्तबा खामेनेई के नाम पर सहमति बना ली है. वे दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बड़े बेटे हैं और लंबे समय से अपने पिता के साथ सत्ता और धार्मिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. हालांकि, उनके पास कोई प्रमुख धार्मिक पद नहीं रहा है, फिर भी सेना और सत्ता प्रतिष्ठान के एक बड़े हिस्से का समर्थन उन्हें प्राप्त बताया जा रहा है.

इजराइल की सीधी चेतावनी

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद इजराइल की प्रतिक्रिया भी काफी सख्त रही है. इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान में जो भी नेता इजराइल, अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ आक्रामक नीतियों को आगे बढ़ाएगा, वह उनके निशाने पर रहेगा. इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि इजराइल, खामेनेई के बाद संभावित नए नेतृत्व को भी सीधे तौर पर चुनौती देने के मूड में है.

उत्तराधिकार को लेकर विवाद

मोज्तबा खामेनेई का नाम सामने आने के साथ ही इस फैसले पर कई सवाल भी उठने लगे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल अयातुल्ला अली खामेनेई ने संभावित उत्तराधिकारियों की जो सूची तैयार की थी, उसमें मोज्तबा का नाम शामिल नहीं था. इसके अलावा शिया धार्मिक परंपरा में सत्ता का पिता से पुत्र को हस्तांतरण आमतौर पर स्वीकार्य नहीं माना जाता, जिससे यह फैसला और अधिक विवादित हो गया है.

आईआरजीसी की भूमिका पर चर्चा

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया जा रहा है कि मोज्तबा के चयन में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की अहम भूमिका रही है. माना जा रहा है कि सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठान के दबाव के चलते यह निर्णय लिया गया. इससे यह भी संकेत मिलता है कि ईरान की आंतरिक राजनीति में सैन्य प्रभाव कितना मजबूत है.

जनता की राय और राजनीतिक संतुलन

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की जनता के एक वर्ग में यह भावना भी थी कि खामेनेई परिवार से ही अगला नेतृत्व आए. ऐसे में मौजूदा हालात और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया हो सकता है. फिर भी, इस निर्णय ने देश की राजनीतिक व्यवस्था और उसकी विचारधारा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

आगे क्या होगा?

मोज्तबा खामेनेई की संभावित नियुक्ति ने ईरान के भविष्य को लेकर कई अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं. एक ओर बाहरी मोर्चे पर अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल स्थिति को और जटिल बना रहे हैं. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान आधिकारिक तौर पर किसे अपना नया सुप्रीम लीडर घोषित करता है और इससे क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है.

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