Russia Israel Relations: दुनिया की राजनीति में कुछ मुल्क ऐसे होते हैं, जिनके बीच सीधे टकराव की संभावना कम होती है, लेकिन जब ये अचानक संवाद करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच जाती है. रूस और इजराइल ऐसे ही देशों में शामिल हैं. इजराइल पारंपरिक रूप से अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है, लेकिन रूस के साथ उसके संबंध भी तनावपूर्ण नहीं रहे हैं.
हाल ही में, गाजा संकट और ईरान से जुड़े तनावों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच एक दुर्लभ फोन कॉल हुई. इस बातचीत को लेकर दोनों देशों के उच्चतम कार्यालयों, क्रेमलिन और इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पुष्टि की है.
वार्ता के मुख्य बिंदु
वार्ता में दोनों नेताओं ने गाजा पट्टी की स्थिति, बंधकों और कैदियों की अदला-बदली, और अमेरिका की मध्यस्थता से बने युद्धविराम समझौते की समीक्षा पर विस्तार से चर्चा की. इसके अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सीरिया में स्थिरता जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी उठाया गया.
इजराइली PMO के अनुसार, यह कॉल पुतिन की पहल पर हुआ, जबकि क्रेमलिन ने इसे गहन विचार-विमर्श करार दिया. यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेता इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं. पिछले महीने भी गाजा और मध्य-पूर्व की स्थिति पर दोनों नेताओं ने बात की थी, जिसमें रूस ने फिलिस्तीन मुद्दे का व्यापक समाधान समर्थन देने की बात दोहराई थी.
वार्ता का वैश्विक महत्व
यह संवाद विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गाजा पर अपना प्रस्ताव पेश किया. यह प्रस्ताव अमेरिका के प्रस्ताव को चुनौती के रूप में देखा गया. रूस का प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल पर जोर देता है, जबकि अमेरिका गाजा के लिए अंतरिम प्रशासनिक बोर्ड (Board of Peace) का सुझाव दे रहा है.
रूस का कहना है कि उसका प्रस्ताव संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने और संतुलित समाधान तैयार करने में मदद करेगा. इसलिए, पुतिन और नेतन्याहू की यह बातचीत न सिर्फ गाजा संकट पर प्रभाव डाल सकती है, बल्कि मध्य-पूर्व में लंबे समय से चली आ रही जटिल राजनीति और संघर्ष समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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