1980 से पाकिस्तान के पीछे पड़ा है इजरायल, भारत मान लेता यह ऑफर तो कब की खत्म हो जाती परमाणु की कहानी

1980 के दशक में भारत और इजरायल के बीच एक ऐसा ही क्षण आया था, एक ऐसा प्रस्ताव, जो अगर मान लिया जाता, तो दक्षिण एशिया का नक्शा शायद आज कुछ और होता.

Israel has been hostile towards Pakistan since 1980
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Internet

इतिहास कभी-कभी ऐसे मोड़ों पर आकर ठहर जाता है, जहां लिए गए फैसले या टाल दिए गए कदमों की गूंज दशकों तक सुनाई देती है. 1980 के दशक में भारत और इजरायल के बीच एक ऐसा ही क्षण आया था, एक ऐसा प्रस्ताव, जो अगर मान लिया जाता, तो दक्षिण एशिया का नक्शा शायद आज कुछ और होता. यह कहानी सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति और वैश्विक ताकतों की चालबाजियों की कहानी है.

पाकिस्तान की बढ़ती ताकत और इजरायल

1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद पाकिस्तान की रणनीति स्पष्ट हो चुकी थी- भारत के खिलाफ संतुलन बनाने के लिए परमाणु हथियार हासिल करना.

पाकिस्तानी सैन्य शासक जनरल जिया-उल-हक के दौर में कड़ी गोपनीयता में न्यूक्लियर प्रोग्राम को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया. अमेरिकी सहयोग, चीनी तकनीक और खाड़ी देशों की आर्थिक मदद से पाकिस्तान धीरे-धीरे परमाणु शक्ति बनने की दहलीज तक पहुंचने लगा.

इसी दौरान इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और उसके सैन्य विशेषज्ञों को यह एहसास हुआ कि पाकिस्तान का यह न्यूक्लियर प्रोग्राम सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि खुद इजरायल के लिए भी एक बड़ा खतरा है.

याद रखें, इजरायल की सुरक्षा नीति में एक बात हमेशा अहम रही है- पहले हमला करो, जब खतरा सिर पर मंडराने लगे. ठीक उसी तर्ज़ पर इजरायल ने 1981 में इराक के ओसिरक न्यूक्लियर रिएक्टर को जमींदोज कर दिया था. अब उनकी नजर पाकिस्तान पर थी, खासकर काहुटा न्यूक्लियर फैसिलिटी पर, जहां उरेनियम संवर्धन का काम चल रहा था.

भारत को मिला था सीक्रेट ऑफर

साल 1984, भारत में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का कार्यकाल. भारत-पाकिस्तान के बीच तीन युद्ध हो चुके थे. एक तरफ सिख आंदोलन के कारण देश के भीतर अस्थिरता थी, तो दूसरी ओर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कार्यक्रम परवान चढ़ रहा था.

इसी माहौल में इजरायल ने भारत को गुप्त रूप से एक प्रस्ताव भेजा. प्लान था-

  • इजरायल के F-15 और F-16 फाइटर जेट्स भारत के जामनगर एयरबेस पर उतरेंगे.
  • वहां से रिफ्यूलिंग करने के बाद, ये लड़ाकू विमान सीधे पाकिस्तान के काहुटा न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करेंगे.
  • भारतीय वायुसेना के जगुआर विमान इस ऑपरेशन में सहयोग करेंगे, ताकि मिशन की सफलता सुनिश्चित की जा सके.
  • टारगेट सिर्फ एक था: पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से तबाह करना.

इंदिरा गांधी की सरकार इस ऑफर पर गंभीरता से विचार कर रही थी. अंदरखाने में योजनाएं बनने भी लगी थीं. रणनीति से लेकर टारगेटिंग और लॉजिस्टिक्स तक की बातें हो चुकी थीं.

अमेरिका का दबाव और भारत की वापसी

जब इस योजना की भनक अमेरिका को लगी, तो वॉशिंगटन तुरंत एक्टिव हो गया. अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत थी खासतौर पर उस वक्त जब सोवियत संघ अफगानिस्तान में फंसा हुआ था और अमेरिका ने मुजाहिदीनों को पाकिस्तान के जरिए मदद पहुंचानी शुरू कर दी थी.

अमेरिका ने साफ संकेत दिए कि अगर भारत और इजरायल ने मिलकर ऐसा कोई कदम उठाया, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

साथ ही पाकिस्तान के साथ एक और युद्ध की आशंका ने भारत को राजनयिक और सैन्य तौर पर चिंतित कर दिया.

यही वजह रही कि अंततः इंदिरा गांधी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

इजरायल के लिए यह एक ऐतिहासिक चूक थी, लेकिन भारत के लिए यह एक संयमित निर्णय.

इंदिरा गांधी के निधन के बाद सब बदल गया

1984 के अंत में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई. उनके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, जिनकी विदेश नीति अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और पश्चिम समर्थक रही.

इजरायल के साथ सैन्य साझेदारी के बीज जरूर बोए गए, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ कोई आक्रामक योजना फिर कभी नहीं बनी.

इस तरह, एक ऐतिहासिक योजना, जो दक्षिण एशिया की तस्वीर बदल सकती थी, कागजों में ही दफ्न होकर रह गई.

इजरायल और पाकिस्तान: अब भी दुश्मन

पाकिस्तान और इजरायल के रिश्ते कभी खुले तौर पर अस्तित्व में ही नहीं रहे. इजरायल आज भी पाकिस्तान को उस देश के तौर पर देखता है, जिसने कई इस्लामिक संगठनों को पनाह दी और जिसकी विदेश नीति में फिलिस्तीन के समर्थन की झलक है.

हाल ही में भी, जब इजरायल ने दोहा (कतर) में हमास नेताओं पर हमला किया, तो पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. पाकिस्तान के नेताओं ने मुस्लिम देशों से इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की और इस्लामिक NATO जैसी फोर्स बनाने का सुझाव भी दिया.

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इजरायल की सुरक्षा नीति में पाकिस्तान एक ‘दूर का लेकिन खतरनाक दुश्मन’ बना हुआ है.

ये भी पढ़ें- कतर में इजरायल के खिलाफ जुटे 50 मुस्लिम देश, पाकिस्तान ने दी जॉइंट फोर्स बनाने की सलाह, होगा एक्शन?