दोहा: मध्य पूर्व में एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है. कतर की राजधानी दोहा में 50 से अधिक मुस्लिम देशों के शीर्ष नेता और विदेश मंत्री एक आपात बैठक में शामिल हुए हैं. इस बैठक का आयोजन अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा किया गया, जिसमें हाल ही में कतर में हुए इजरायली हमले की निंदा करते हुए भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई.
यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब 9 सितंबर 2025 को इजराइल ने कतर की राजधानी दोहा में एक टारगेटेड हमला किया था. इस हमले में हमास के पांच सदस्य और कतर का एक सुरक्षा अधिकारी मारा गया.
इजरायली सेना ने दावा किया कि यह हमला हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या को निशाना बनाकर किया गया था, जो उस वक्त अमेरिका की ओर से प्रस्तावित संभावित युद्धविराम योजना पर चर्चा करने के लिए दोहा में मौजूद थे. हालांकि खलील इस हमले में बच गए, लेकिन इस घटना ने पूरी इस्लामी दुनिया को झकझोर कर रख दिया.
इजरायली हमले पर कतर की तीखी प्रतिक्रिया
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा था कि इजरायल "इस कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी लेता है" और जो कोई भी आतंकवाद को आश्रय देगा, उसे अंजाम भुगतने होंगे.
दूसरी ओर, कतर ने इस हमले को सीधा संप्रभुता पर हमला बताते हुए इसे "कायराना हरकत" करार दिया. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह हमला "सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों का उल्लंघन" है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कतर अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा.
ईरान और पाकिस्तान के सख्त सुर
इस्लामी देशों की इस आपात बैठक से पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने सभी इस्लामी राष्ट्रों से इजरायल से अपने राजनयिक और व्यापारिक संबंध तोड़ने की मांग की. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह वक्त "कड़े फैसले" लेने का है और इस्लामी उम्माह को अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए.
वहीं पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने मिलकर यह सुझाव दिया कि सभी मुस्लिम देश एक संयुक्त रक्षा बल यानी 'इस्लामिक NATO' जैसी एक फौज तैयार करें.
पाकिस्तान ने यह भी कहा कि अगर उम्माह एकमत हो जाए तो कोई भी ताकत उसे चुनौती नहीं दे सकती. उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान, जो एक न्यूक्लियर पावर है, इस फोर्स में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है और इस्लामी दुनिया की रक्षा की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है.
दोहा में बंद कमरे में हुई उच्चस्तरीय बैठक
रविवार को हुई इस बैठक में इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने बंद दरवाजों के पीछे विचार-विमर्श किया. इस दौरान कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा की गई:
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने इस बैठक में साफ कहा कि इजरायली हमले ने "कतर की संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति को चुनौती दी है", और कतर इसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं करेगा.
हमास के राजनीतिक दायरे पर हमला
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का यह हमला न सिर्फ हमास पर, बल्कि कतर की मध्यस्थता भूमिका पर भी सीधा हमला है. कतर ने लंबे समय से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.
हमास की दोहा स्थित राजनीतिक शाखा को लेकर पहले भी कई बार इजरायल और अमेरिका में असहमति देखी गई है, लेकिन यह पहली बार है जब कतर की धरती पर सीधा सैन्य हमला किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद असामान्य है.
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