यरुशलम से आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. इजराइल ने चीन में बनी गाड़ियों को लेकर ऐसा कदम उठाया है, जो उसके सुरक्षा तंत्र की गहराई में मौजूद डर को उजागर करता है. देश ने “मेड इन चाइना” वाहनों को सरकारी इस्तेमाल से प्रतिबंधित करने का फैसला किया है. वजह—इन गाड़ियों के ज़रिए जासूसी होने का शक. इस फैसले के साथ इजराइल ने अपने सैन्य और सरकारी दफ्तरों में अलर्ट घोषित कर दिया है.
इजराइली प्रशासन को संदेह है कि चीन में बनी कुछ गाड़ियां, जिनका इस्तेमाल सरकारी और सैन्य अधिकारी कर रहे थे, संवेदनशील जानकारियां चोरी करने में सक्षम हैं. इन वाहनों में अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हुए हैं, जो संभावित तौर पर निगरानी उपकरण की तरह काम कर सकते हैं. इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल प्रभाव से इन गाड़ियों की जब्ती शुरू कर दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे वाहनों की संख्या लगभग 700 है. फिलहाल पहले चरण में उन अधिकारियों की गाड़ियां जब्त की जा रही हैं जो संवेदनशील पदों पर हैं या जिनका काम राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा है.
यरुशलम में बढ़ी चिंता, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
इजराइल के मिलिटरी चीफ ऑफ स्टाफ ने सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि चीन में बनी किसी भी कार को सरकारी कार्य में प्रयोग न किया जाए. अधिकारियों का कहना है कि इन वाहनों में इस्तेमाल किए गए उपकरणों को “उच्च खतरे की श्रेणी” में रखा गया है. हालांकि अब तक इस जासूसी के ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इजराइली इंटेलिजेंस एजेंसियां इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हैं. सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अगर इन गाड़ियों से डेटा ट्रांसमिशन या लोकेशन ट्रैकिंग के संकेत मिले, तो यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर सकता है.
अमेरिका और ब्रिटेन पहले ही लगा चुके हैं रोक
इजराइल का यह फैसला बिल्कुल नया नहीं है. इससे पहले अमेरिका और ब्रिटेन भी चीनी तकनीक पर सख्ती बरत चुके हैं. इन देशों में सरकारी ठिकानों पर चीनी उपकरणों—खासकर कैमरा सिस्टम और कम्युनिकेशन डिवाइस—का इस्तेमाल सीमित कर दिया गया है. पश्चिमी देशों को यह डर है कि चीन अपनी टेक्नोलॉजी का उपयोग “डेटा सर्विलांस” के लिए कर सकता है. इसी पैटर्न को देखते हुए अब इजराइल ने भी अपनी डिजिटल और भौतिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है.
लेबनान के “पेजर ब्लास्ट” से जुड़ी यादें ताज़ा
कुछ समय पहले लेबनान में हुए “सीरियल पेजर धमाकों” को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा थी कि यह इजराइल की एक गुप्त रणनीति का हिस्सा था. उस घटना के बाद से ही इजराइली सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित तकनीकी खतरे को लेकर अत्यधिक संवेदनशील हो गई हैं. अब “मेड इन चाइना” गाड़ियों पर रोक उसी सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति की पृष्ठभूमि में चीन की भूमिका
गाजा में जारी संघर्ष को लेकर चीन ने खुले तौर पर इजराइल की नीतियों की आलोचना की है और फिलिस्तीन के पक्ष में बयान दिए हैं. वह अमेरिका के समर्थन को भी सवालों के घेरे में लाता रहा है. ऐसे में इजराइल को यह संदेह और गहरा लग रहा है कि चीन तकनीकी माध्यमों के जरिए उसकी गतिविधियों की निगरानी कर सकता है.
मार्च 2026 तक हटाई जाएंगी सभी संदिग्ध गाड़ियां
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया कई चरणों में चलेगी और मार्च 2026 तक सभी संदिग्ध चीनी गाड़ियां हटा दी जाएंगी. ज्यादातर गाड़ियां 7-सीटर SUV मॉडल की हैं, जिनका इस्तेमाल उच्च अधिकारियों द्वारा किया जा रहा था.इजराइल का यह कदम वैश्विक स्तर पर “टेक्नोलॉजिकल जासूसी” को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कई अन्य देश भी इसी तरह के प्रतिबंध लगा सकते हैं, क्योंकि आधुनिक वाहन अब सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि चलते-फिरते डेटा सिस्टम बन चुके हैं.
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