हमास के आतंकियों को छोड़कर बड़ी गलती कर बैठा इजरायल, सऊदी का नहीं मिला साथ तो मुश्किल में पड़ जाएंगे नेतन्याहू

Israel Hamas War: इजरायल ने सैन्य अभियान में जमीन पर बड़ी जीत हासिल की हो सकती है, पर हमास को मिटा देना उतना सरल प्रतीत नहीं हो रहा. हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि हमास अब खुले युद्ध के बदले राजनीतिक और कूटनीतिक मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है, एक ऐसा रूप जो उसे फिर से वैधता और प्रभाव दिला सकता है.

Israel big mistake leaving Hamas terrorists Saudi does not get support Netanyahu in trouble
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Israel Hamas War: इजरायल ने सैन्य अभियान में जमीन पर बड़ी जीत हासिल की हो सकती है, पर हमास को मिटा देना उतना सरल प्रतीत नहीं हो रहा. हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि हमास अब खुले युद्ध के बदले राजनीतिक और कूटनीतिक मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है, एक ऐसा रूप जो उसे फिर से वैधता और प्रभाव दिला सकता है.

गठबंधन और लड़ाई के पुराने मॉडल अब बदल रहे हैं. हमास स्पष्ट रूप से समझ चुका है कि केवल सैन्य बल से बचपन की कमी है, वैश्विक सहानुभूति, मीडिया का परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में स्थान अब निर्णायक बन चुके हैं. इसलिए उसने पारंपरिक रॉकेट और सुरंगों से हटकर राजनीतिक प्रतिष्ठा, दूतावसी सम्बंध और संस्थागत समावेशन की राह अपनाने शुरू कर दी है.

फतह के थश्रे से सीख: राजनयिक गलियारों की ताकत

फतह ने लंबे समय से यही किया, हथियारों के साथ-साथ कूटनीतिक प्लेटफ़ॉर्मों में जगह बनाई और अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल की. हमास अब इसी नक़्शे कदम पर चल कर गाजा के सैन्य नियंत्रण को छोड़कर राजनीतिक प्रभाव का विस्तार चाहता है. इसका मतलब यह भी है कि हमास स्थानीय जमीन छोड़ने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय मंचों और राजनयिक नेटवर्क के जाल के जरिए प्रभाव बरकरार रखना चाहता है.

कतर और तुर्की: राजनीतिक कवर और आर्थिक सहारा

कतर और तुर्की की भूमिका इस परिवर्तन में निर्णायक दिखती है. कतर ने मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के बहाने अरबों डॉलर भेजकर हमास के लिए वैद्यिक-राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश की है, जबकि मीडिया हब जैसे अल जज़ीरा ने हमास के राजनीतिक चेहरे को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया है. ये देश वैचारिक और राजनैतिक तौर पर ऐसे संगठनों के साथ खड़े होने में रुचि रखते हैं जो मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े रहे हैं, और यह हमास के “नए-राजनीतिक” रुझान को अपेक्षाकृत ताकत देता है.

सऊदी-यूएई की रोकथाम और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण

पर हर जगह हमास का स्वागत नहीं हो रहा. सऊदी अरब और UAE इसे क्षेत्र में अस्थिरता और उथलपुऱि मानते हैं और इसलिए वे हमास को वैधता प्रदान करने के किसी भी प्रयास का विरोध कर रहे हैं. इन देशों के लिए हमास एक राजनीतिक विचारधारा है जो उनके घरेलू और आर्थिक सुधारों के रास्ते में बाधा बन सकती है, इसलिए वे खुले मंचों पर हमास के समर्थन का विरोध करते हैं.

इजरायल के सामने रणनीतिक विकल्प

डिप्लोमैटिक मोर्चे पर इजरायल के लिए अब दो रास्ते हैं. पहला- क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना: सऊदी अरब और UAE के साथ सम्बन्ध सुधारकर और ग्रीस-साइप्रस के साथ रणनीतिक समन्वय बढ़ाकर तुर्की-कतर के प्रोजेक्शन को नियंत्रित करना. दूसरा- ग्लोबल पॉलिसिंग: अंतरराष्ट्रीय अदालतों, मीडिया और युवा जनमत के बीच अपनी स्थिति सुधारने के लिये अधिक प्रभावी कूटनीति और सार्वजनिक कते करनी होगी.

 यदि इजरायल ट्रम्प प्रशासन जैसे शक्तिशाली वैश्विक साझेदारों को अपने साथ बांधे रखेगा, तो वह हमास की राजनीतिक वैधता को चुनौती दे सकता है. नहीं तो हमास, कतर और तुर्की के सहयोग से, एक नए सियासी संकट का स्रोत बन सकता है.

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