इजरायल और अमेरिका के बाद ईरान के खिलाफ इस देश की सेना हुई एक्टिव, खाड़ी क्षेत्र में तैनात किए फाइटर जेट्स

US Iran Tensions: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य कदम बढ़ा दिए हैं. ब्रिटिश रॉयल एयर फ़ोर्स (RAF) के टाइफून लड़ाकू जेट्स को कतर भेजा गया है. यह तैनाती विशेष रूप से कतर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है, ताकि ईरान की ओर से किसी संभावित जवाबी हमले का खतरा कम किया जा सके.

Israel and America Britain army became active against Iran fighter jets deployed in the Gulf region
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US Iran Tensions: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने खाड़ी क्षेत्र में अपने सैन्य कदम बढ़ा दिए हैं. ब्रिटिश रॉयल एयर फ़ोर्स (RAF) के टाइफून लड़ाकू जेट्स को कतर भेजा गया है. यह तैनाती विशेष रूप से कतर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है, ताकि ईरान की ओर से किसी संभावित जवाबी हमले का खतरा कम किया जा सके. ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पूरी तरह रक्षात्मक है और इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, न कि ईरान पर हमला करना.

यह तैनाती इस बात का संकेत भी है कि ईरान को लेकर क्षेत्रीय बेचैनी अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है. खाड़ी देश, विशेष रूप से छोटे और सीमित संसाधनों वाले राष्ट्र, संभावित युद्ध की परिस्थितियों में सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं.

ब्रिटेन क्यों ले रहा भूमिका बदलकर?

ब्रिटेन का मध्य पूर्व में प्रवेश सीधे युद्ध में शामिल होने के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई साझेदारी और सहयोग की भावना से की गई है. कतर और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग दशकों पुराना है और दोनों देश मिलकर क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं.

हाल ही में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर किसी भी देश ने उस पर हमला किया, तो उसका जवाब “समग्र युद्ध” जैसा होगा. ऐसे में छोटे देशों, जैसे कतर, पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है, क्योंकि उनकी सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था सभी संकटग्रस्त हो सकते हैं.

अमेरिका और ब्रिटेन की रणनीति में अंतर

हालांकि अमेरिका पहले से ही मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत मजबूत कर चुका है, ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के संभावित हमले में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होगा. इसका प्रमुख कारण यह है कि ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से पहले हमलावर अभियान का समर्थन नहीं कर सकता.

इसके बजाय, ब्रिटेन की प्राथमिकता खाड़ी सहयोगियों की रक्षा और उनकी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि ब्रिटेन अपने खाड़ी सहयोगियों की रक्षा के लिए अलर्ट मोड में है. कतर जैसे देश, जहां अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य आधार मौजूद हैं, इस रणनीति का केंद्र हैं.

क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को लेकर ब्रिटेन की सोच

ब्रिटेन की यह तैनाती यह भी दर्शाती है कि देश युद्ध से बचाव और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है. यह कदम न केवल संभावित हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक तालमेल बनाए रखने का संकेत भी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन की भूमिका अब “सुरक्षा साझेदारी और रक्षात्मक उपायों” तक सीमित रहेगी. किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में ब्रिटेन सीधे हमले में शामिल नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र में मौजूद देशों की रक्षा और नागरिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा.

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