भारत के नाबालिगों को टारगेट कर पाकिस्तान के लिए जासूसी करा रहा ISI, अब तक 37 बच्चों को फंसाया, खुलासा

    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा भारत के नाबालिगों को जासूसी नेटवर्क में शामिल किए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है.

    ISI is spying for Pakistan by targeting Indian minors
    प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा भारत के नाबालिगों को जासूसी नेटवर्क में शामिल किए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है. पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में खुलासा हुआ है कि ISI अब सीधे तौर पर भारतीय टीनएजर्स को सोशल मीडिया और ऑनलाइन ऐप्स के जरिए निशाना बना रही है. अब तक 37 से ज्यादा नाबालिगों के इस नेटवर्क के संपर्क में आने की पुष्टि की गई है.

    15 वर्षीय नाबालिग की गिरफ्तारी से खुला राज

    पंजाब पुलिस ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक मामले का खुलासा करते हुए 15 वर्षीय एक नाबालिग को हिरासत में लिया है. पुलिस के अनुसार, यह किशोर पाकिस्तान स्थित एजेंसियों और उनके फ्रंट आतंकी संगठनों के संपर्क में था. पुलिस अधिकारी डी.एस. ढिल्लों ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया.

    नाबालिग की पहचान संजीव कुमार के रूप में हुई है, जो जम्मू के सांबा क्षेत्र का निवासी है. जांच में सामने आया कि वह पिछले लगभग एक वर्ष से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीमा पार बैठे लोगों से लगातार संपर्क में था.

    ISI और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों से संपर्क

    पुलिस के अनुसार, संजीव न सिर्फ ISI बल्कि पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े व्यक्तियों से भी संवाद कर रहा था. आरोप है कि वह भारत की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था.

    जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि उसका मोबाइल फोन क्लोन किया गया था, जिससे फोन में मौजूद डेटा को दूर बैठे लोग सीधे एक्सेस कर सकते थे. इसके अलावा, नाबालिग ने कुछ महत्वपूर्ण स्थानों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की थी, जिन्हें लाइव ट्रांसमिट किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

    मानसिक दबाव का फायदा उठा रही थीं एजेंसियां

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिग के पिता की करीब डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी थी. हालांकि मौत के कारणों की पुष्टि जांच में नहीं हुई, लेकिन किशोर का मानना था कि उसके पिता की हत्या हुई है. इसी मानसिक तनाव, अकेलेपन और भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर पाकिस्तानी एजेंसियों ने उसे अपने जाल में फंसाया.

    पुलिस के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क बच्चों को पहले भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं और फिर उन्हें हथियार प्रशिक्षण, पैसों या अन्य लालच का झांसा देकर संवेदनशील जानकारियां जुटाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

    ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इस मामले में नाबालिग के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें गुमराह करने वाले नेटवर्क से बाहर निकालना और समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है.

    पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उनसे खुलकर संवाद बनाए रखें, ताकि समय रहते किसी भी खतरे को रोका जा सके.

    ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन रहे ISI का नया हथियार

    सुरक्षा एजेंसियों के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान अब जासूसी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहा है. ISI ने भारत के खिलाफ जासूसी के लिए एक नया और खतरनाक तरीका अपनाया है, जिसमें 14 से 17 वर्ष के किशोरों को विशेष रूप से टारगेट किया जा रहा है.

    इन बच्चों को धीरे-धीरे ब्रेनवॉश कर उनसे सैन्य ठिकानों की तस्वीरें, सेना की गतिविधियों और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल की जा रही थीं.

    37 से ज्यादा किशोर संपर्क में

    जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक 37 से अधिक किशोर ISI के संपर्क में आ चुके हैं. इनमें से:

    • 12 किशोर पंजाब और हरियाणा से
    • लगभग 25 किशोर जम्मू-कश्मीर से जुड़े बताए जा रहे हैं

    इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश पठानकोट में 15 वर्षीय एक लड़के की गिरफ्तारी के बाद हुआ. इसके बाद कई डिजिटल लिंक सामने आए, जिनसे ISI के ऑनलाइन जासूसी मॉडल का खुलासा हुआ.

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