'पाकिस्तान 57 इस्लामी देशों का नेतृत्व करेगा...' सऊदी के साथ हुई डिफेंस डील तो उछलने लगे इशाक डार

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इशाक डार ने एक बड़ा और साहसिक दावा करते हुए कहा है कि यदि अधिक इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान और सऊदी अरब के हालिया रक्षा समझौते में शामिल होते हैं, तो यह गठबंधन भविष्य में "इस्लामी नाटो" की शक्ल ले सकता है.

Ishaq Dar started boasting about Saudi-Pak defense deal
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इशाक डार ने एक बड़ा और साहसिक दावा करते हुए कहा है कि यदि अधिक इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान और सऊदी अरब के हालिया रक्षा समझौते में शामिल होते हैं, तो यह गठबंधन भविष्य में "इस्लामी नाटो" की शक्ल ले सकता है. संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अब न केवल एक सैन्य शक्ति बल्कि एक आर्थिक शक्ति बनने के लिए भी कदम उठाने होंगे.

सऊदी अरब के साथ रक्षा संधि

डार ने 18 सितंबर को सऊदी अरब के साथ हस्ताक्षरित रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि यह कोई तात्कालिक या जल्दबाज़ी में लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि एक सोच-समझकर और व्यापक विचार-विमर्श के बाद उठाया गया कदम था. इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सामरिक सहयोग को मज़बूत करना है.

संझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और वे एकजुट होकर प्रतिक्रिया देंगे. यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के लिए सामरिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

अन्य इस्लामी देशों की रुचि

डार के अनुसार, इस रक्षा संधि ने अन्य इस्लामी देशों, विशेष रूप से अरब और गैर-अरब देशों के बीच भी उत्सुकता पैदा की है. उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कई देशों ने पाकिस्तान से संपर्क कर इस तरह के समझौतों में अपनी भागीदारी में रुचि दिखाई है.

उन्होंने आगे कहा, “अगर ये देश आगे बढ़ते हैं और इस पहल में शामिल होते हैं, तो यह गठबंधन एक ऐसा रूप ले सकता है जिसे हम ‘नया नाटो’ या ‘पूर्वी नाटो’ कह सकते हैं.”

पाकिस्तान की वैश्विक भूमिका पर डार

इशाक डार ने अपने भाषण में पाकिस्तान की रणनीतिक और वैचारिक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश अब केवल एक परमाणु शक्ति के रूप में नहीं जाना जाना चाहिए, बल्कि इसे एक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भी ठोस प्रयास करने चाहिए.

उन्होंने कहा, “ईश्वर की मर्ज़ी से, पाकिस्तान एक दिन 57 इस्लामी देशों का नेतृत्व करेगा. हमें सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत बनने पर भी जोर देना होगा. यह हमारी सामूहिक इच्छाशक्ति और प्रयास से ही संभव होगा.”

गाजा संकट और क्षेत्रीय घटनाक्रम

उप प्रधानमंत्री डार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित गाजा शांति योजना पर बोलते हुए, इस क्षेत्रीय अस्थिरता की पृष्ठभूमि में सऊदी-पाक रक्षा समझौते को और भी अधिक प्रासंगिक बताया. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस तरह के समझौते केवल रक्षा तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका उद्देश्य राजनीतिक संतुलन, सुरक्षा की गारंटी और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करना भी होता है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर ऐसे समय में हुए हैं जब इज़राइल ने हाल ही में कतर पर हमला किया था, जिससे पूरे अरब क्षेत्र में सुरक्षा संकट गहरा गया था. इसी के मद्देनज़र कई इस्लामी देशों ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की ज़रूरत को महसूस किया है.

भारत के साथ तनाव का ज़िक्र

डार ने अपने संबोधन में मई 2025 में भारत के साथ हुए चार दिवसीय सैन्य टकराव का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यदि सऊदी-पाक समझौता उस समय पहले से लागू होता, तो भारत का यह हमला न केवल पाकिस्तान पर बल्कि सऊदी अरब पर भी हमले के तौर पर देखा जाता.

इस सन्दर्भ में उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यह संधि पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी, जिससे भविष्य में संभावित खतरे या आक्रमण की स्थिति में उसे अकेले नहीं खड़ा होना पड़ेगा.

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