ईरान की वो सीक्रेट न्‍यूक्‍ल‍ियर साइट, जिसे तबाह करना लगभग नामुमकिन, क्या यहीं छिपाया है यूरेनियम?

ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चिंता गहराने लगी है. ताज़ा फोकस उस पहाड़ी क्षेत्र पर है जिसे 'पिकैक्स माउंटेन' कहा जाता है.

Irans secret nuclear site which is almost impossible to destroy
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- Internet

तेहरान: ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चिंता गहराने लगी है. ताज़ा फोकस उस पहाड़ी क्षेत्र पर है जिसे 'पिकैक्स माउंटेन' कहा जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इलाका ईरान की सबसे सुरक्षित और गुप्त भूमिगत परमाणु स्थलों में से एक माना जा रहा है.

यह साइट नातांज परमाणु केंद्र के बेहद करीब स्थित है — वही केंद्र जिसे अमेरिका ने पहले अपने हवाई हमलों का निशाना बनाया था. हालांकि अमेरिका ने दावा किया था कि उसके हमलों से तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा, लेकिन विशेषज्ञों के बीच अब यह सवाल फिर उठने लगा है: क्या संवर्धित यूरेनियम का भंडार पूरी तरह खत्म किया जा चुका है?

400 किलोग्राम यूरेनियम और सुरंगों की आशंकाएं

ब्रिटेन की मीडिया रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से यह संकेत मिले हैं कि पिकैक्स क्षेत्र में हाल के दिनों में गतिविधियां बढ़ी हैं. तस्वीरों में भारी वाहन और लॉरियां क्षेत्र में आती-जाती देखी गई हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां लगभग 400 किलोग्राम तक उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम संग्रहीत हो सकता है — यह मात्रा एक या उससे अधिक परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है.

पिकैक्स माउंटेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक संरचना है. यह लगभग 100 मीटर गहराई में स्थित है और इसमें कई सुरंग मार्ग हैं, जो इसे हवाई हमलों से काफी हद तक सुरक्षित बनाते हैं. कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थल अमेरिका के अत्याधुनिक B2 स्टील्थ बॉम्बर्स से भी सुरक्षित रह सकता है.

IAEA की चेतावनी और ईरान का जवाब

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने इस साइट पर हो रही गतिविधियों को लेकर ईरान से औपचारिक जानकारी मांगी थी. हालांकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि IAEA को इस स्थल पर निरीक्षण की अनुमति नहीं दी जाएगी. ग्रॉसी ने आशंका जताई कि यह संभव है कि पिकैक्स क्षेत्र में परमाणु संबंधी कार्य पहले से ही चल रहे हों.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी प्रणाली पर असर

इस घटनाक्रम के बाद ईरान और IAEA के बीच संबंधों में और खटास आ गई है. ईरानी संसद ने एक नया कानून पारित किया है, जिसमें IAEA को 'राजनीतिक उपकरण' बताया गया है और उसके साथ सहयोग को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया गया है. इससे वैश्विक परमाणु निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है.

आगे क्या?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के अधिकारी आगामी सप्ताह में फिर से परमाणु वार्ता के लिए मिल सकते हैं. हालांकि यह प्रक्रिया पहले उस समय ठप हो गई थी जब इजराइल और ईरान के बीच टकराव तेज हो गया था. फिलहाल, दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम कायम है, लेकिन स्थायी समाधान अब भी अधर में है.

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