मिडिल ईस्ट जंग के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, GST, UPI और ऑटो बिक्री में रिकॉर्ड उछाल

मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी तनाव को एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष का असर अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई दे रहा है.

Indian economy strong even among the Middle East GST UPI
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Indian Economy: मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी तनाव को एक महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष का असर अर्थव्यवस्थाओं पर साफ दिखाई दे रहा है. कई देशों को महंगाई, सप्लाई चेन में बाधा और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, इन मुश्किल हालातों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में नजर आ रही है.

वित्त वर्ष के अंत में जारी हाई-फ्रीक्वेंसी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बावजूद भारत ने आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनाए रखी है. टैक्स कलेक्शन, ऑटोमोबाइल बिक्री, बिजली खपत और डिजिटल लेनदेन जैसे प्रमुख संकेतकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

GST कलेक्शन में मजबूत बढ़त

मार्च महीने में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में साल-दर-साल 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इस दौरान कुल GST संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 1.84 लाख करोड़ रुपये था. यह वित्त वर्ष 2025-26 का तीसरा सबसे बड़ा मासिक कलेक्शन रहा.

इससे पहले अप्रैल में GST कलेक्शन 2.36 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जबकि मई में यह करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा था. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं.

ऑटो सेक्टर में शानदार प्रदर्शन

ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है. मार्च महीने में घरेलू पैसेंजर वाहनों की बिक्री में 16.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. अनुमान के मुताबिक इस दौरान करीब 4.5 लाख कारें बिकीं, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 3.87 लाख था.

पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कारों की बिक्री 8.3 प्रतिशत बढ़कर 47 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल 43.4 लाख यूनिट थी. यह बढ़त दर्शाती है कि उपभोक्ता मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.

बिजली खपत और रेल माल ढुलाई में वृद्धि

ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी सुधार देखा गया है. मार्च में बिजली की खपत 1.8 प्रतिशत बढ़कर 149.56 अरब यूनिट तक पहुंच गई. वहीं रेलवे माल ढुलाई में 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बढ़कर 166.2 मिलियन टन हो गई.

ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि औद्योगिक गतिविधियां और आर्थिक गतिशीलता बनी हुई है.

डिजिटल पेमेंट में रिकॉर्ड तेजी

डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भी भारत ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं. मार्च महीने में UPI ट्रांजैक्शन 22.6 अरब तक पहुंच गए, जो पिछले साल के मुकाबले 23.5 प्रतिशत ज्यादा हैं. यह डिजिटल इकोनॉमी के तेजी से विस्तार को दर्शाता है और देश में कैशलेस ट्रांजैक्शन की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दिखाता है.

चुनौतियां अभी भी बरकरार

हालांकि मौजूदा आंकड़े सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. विशेष रूप से LPG की संभावित कमी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन में बाधाएं भविष्य में असर डाल सकती हैं.

यदि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और आयात पर निर्भरता भारत के लिए दबाव बढ़ा सकती है.

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