S-400 से लेकर धनुष गन सिस्टम तक... 2.38 लाख करोड़ रुपये की मेगा डील को मिली मंजूरी; दुश्मनों का हाल बेहाल

Rajnath Singh Defence Deals: भारत अपनी रक्षा ताकत को लगातार मजबूत करने में जुटा है. इसी दिशा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (DAC) की अहम बैठक में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है.

S 400 aakshteer Dhanush gun system mega defence deal worth Rs 2.38 lakh crore approved
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Rajnath Singh Defence Deals: भारत अपनी रक्षा ताकत को लगातार मजबूत करने में जुटा है. इसी दिशा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (DAC) की अहम बैठक में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. यह मंजूरी AoN (Acceptance of Necessity) के तहत दी जाती है, जिसका मतलब है कि अब इन हथियारों और सिस्टम की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर में हुई यह बैठक कई मायनों में खास रही. इस पूरे साल में अब तक कुल 6.73 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इससे साफ है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहता.

सेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

इस फैसले के तहत भारतीय सेना को कई आधुनिक और ताकतवर सिस्टम मिलने वाले हैं. इनमें ‘धनुष’ गन सिस्टम खास तौर पर अहम है. यह एक स्वदेशी तोप है, जो लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इसके शामिल होने से सेना की आर्टिलरी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

इसके अलावा एयर डिफेंस से जुड़े नए सिस्टम भी दिए जाएंगे, जिससे सेना को दुश्मन के हवाई हमलों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी और समय रहते जवाब दिया जा सकेगा. आधुनिक निगरानी तकनीक के तहत ऐसे ड्रोन सिस्टम भी शामिल किए जा रहे हैं, जिन्हें बिना रनवे के भी उड़ाया जा सकता है. इससे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी आसानी से नजर रखी जा सकेगी.

साथ ही टैंकों के लिए खास तरह का गोला-बारूद भी मंजूर किया गया है, जो दुश्मन के भारी और मजबूत टैंकों को भी आसानी से नष्ट कर सकता है. यह सब मिलकर जमीनी लड़ाई में भारतीय सेना को और ज्यादा मजबूत बनाएगा.

वायु सेना को मिलेगा नया बल

भारतीय वायु सेना के लिए भी इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं. सबसे अहम है एस-400 मिसाइल सिस्टम के नए प्रस्तावों को मंजूरी मिलना. यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों और विमानों को काफी दूर से ही नष्ट करने में सक्षम है, जिससे देश की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी.

इसके साथ ही पुराने हो चुके AN-32 और IL-76 जैसे विमानों की जगह नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लाने की योजना है. इससे सैनिकों और सैन्य सामान की तेजी से आवाजाही हो सकेगी और जरूरत के समय तुरंत कार्रवाई करना आसान होगा.

रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट यानी ड्रोन भी इस योजना का हिस्सा हैं. ये ड्रोन न केवल निगरानी करेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला भी कर सकेंगे. इसके अलावा सुखोई Su-30 विमानों के इंजन की मरम्मत और अपग्रेड को भी मंजूरी दी गई है, जिससे उनकी क्षमता और बढ़ेगी.

कोस्ट गार्ड को भी मिलेगा फायदा

इस फैसले का लाभ सिर्फ सेना और वायु सेना को ही नहीं, बल्कि भारतीय कोस्ट गार्ड को भी मिलेगा. कोस्ट गार्ड के लिए हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स को मंजूरी दी गई है. ये खास तरह के वाहन समुद्र में तेज गति से चल सकते हैं और खोज-बचाव अभियानों में काफी मददगार साबित होते हैं. इसके साथ ही तटीय सुरक्षा को भी इससे मजबूती मिलेगी.

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

इन सभी फैसलों से यह साफ होता है कि भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए तेजी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस साल रक्षा मंत्रालय ने 55 बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है और 2.28 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के 500 से अधिक खरीद समझौते किए हैं.

कुल मिलाकर, भारत एक ऐसी मजबूत रक्षा व्यवस्था तैयार कर रहा है, जो हर तरह के खतरे का सामना करने में सक्षम हो. यह न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए भी भारत को पूरी तरह तैयार करेगा.

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