India Russia Oil Import: ईरान जंग के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है. पुराने दोस्त रूस ने मुश्किल समय में साथ दिया है. पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है.
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल खाड़ी देशों से मंगाता है, इसलिए इस संकट का असर भारत पर भी पड़ा. लेकिन अब भारत ने नई रणनीति अपनाते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है.
खाड़ी देशों से सप्लाई घटी
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण इराक और यूएई से तेल की सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है. इसी तरह सऊदी अरब और कुवैत से भी कम तेल आ रहा है. इसकी वजह ईरान और इज़राइल के बीच तनाव और उसमें अमेरिका की भागीदारी है, जिससे पूरा इलाका अस्थिर हो गया है.
रूस से तेजी से बढ़ी खरीद
खाड़ी देशों से कमी को पूरा करने के लिए भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ा दी है. मार्च के पहले 25 दिनों में रूस से तेल आयात 80% से ज्यादा बढ़ गया. अब भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी भी काफी बढ़ चुकी है.
भारत की जरूरत और स्थिति
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 88% आयात करता है. ऐसे में दुनिया में कहीं भी संकट आता है, तो उसका असर भारत पर पड़ता है. हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में है. कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन कंपनियों ने अपने स्टॉक (भंडार) का इस्तेमाल करके हालात संभाल लिए हैं. रिफाइनरी का काम भी सामान्य चल रहा है.
अमेरिका का बदला रुख
इस पूरे मामले में अमेरिका का रुख भी बदला हुआ नजर आया. पहले वह भारत पर रूस से तेल कम खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन अब उसने कुछ समय के लिए छूट दे दी है. इसका कारण यह है कि अमेरिका भी तेल की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल में रखना चाहता है.
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