थमने वाली है ईरान-अमेरिका की जंग! कब और कहां होगी डील, सब हो गया फाइनल? रिपोर्ट में बड़ा दावा

Middle East Tensions: पश्चिम एशिया में कई हफ्तों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. लंबे समय से आमने-सामने खड़े अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही किसी बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही है.

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Middle East Tensions: पश्चिम एशिया में कई हफ्तों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. लंबे समय से आमने-सामने खड़े अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही किसी बड़े समझौते की संभावना जताई जा रही है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है.

जिनेवा बन सकता है समझौते का गवाह

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच संभावित समझौते के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर को चुना जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रविवार को दोनों पक्ष किसी ऐतिहासिक डील पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो यह पिछले कई महीनों से जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा. 

दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इस संभावित बैठक पर नजर बनाए हुए हैं. माना जा रहा है कि यदि समझौता सफल रहता है तो क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी और वैश्विक बाजारों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं बदला ईरान का रुख

जहां एक ओर समझौते की चर्चाएं तेज हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख में कोई नरमी नहीं बरतेगा. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र रहा है. ईरान की सरकारी मीडिया और आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कहा है कि प्रस्तावित समझौते में ऐसा कोई प्रावधान शामिल नहीं है, जिसके तहत तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना नियंत्रण छोड़ना पड़े.

समझौते के मसौदे को लेकर तेहरान का दावा

ईरानी मीडिया के अनुसार, वर्तमान मसौदे की रूपरेखा में ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई है जो ईरान की समुद्री रणनीति को प्रभावित करती हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश पर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन या नियंत्रण को छोड़ने का कोई दबाव नहीं बनाया गया है. तेहरान का यह भी कहना है कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य गतिविधियों से पहले की स्थिति को बहाल करने की बाध्यता भी इस मसौदे में शामिल नहीं है. यानी ईरान अपने मौजूदा रणनीतिक हितों से समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा है.

पूरी दुनिया की नजरें रविवार पर

संभावित समझौते को लेकर अब वैश्विक स्तर पर उत्सुकता बढ़ गई है. यदि जिनेवा में बातचीत सफल रहती है और दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.

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