Middle East Tensions: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस आशंका को जन्म दे दिया है कि क्षेत्र में एक और बड़ा सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर उनकी सेना तीसरी बार भी ईरान पर हमला कर सकती है. दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इन घटनाक्रमों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
क्या फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा है ईरान?
हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जरूर बनी थी, लेकिन ताजा घटनाओं ने हालात फिर से बदल दिए हैं. पहले अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई भी देखने को मिली. अब इजरायल की ओर से तीसरी बार सैन्य कार्रवाई की संभावना जताए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या खाड़ी क्षेत्र एक बार फिर युद्ध की आग में झुलसने वाला है.
नेतन्याहू ने दी तीसरे हमले की चेतावनी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी सेना पहले भी दो बार ईरान के भीतर जाकर कार्रवाई कर चुकी है और यदि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी ऐसा करने से पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, तब तक ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उनके इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ईरान ने भी दिया सख्त जवाब
इजरायल की चेतावनी के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघिर कालिबाफ ने कहा कि उनका देश बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देता है, लेकिन यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं तो ईरान किसी भी सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं.
ट्रंप की रणनीति पर भी टिकी दुनिया की नजर
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ ईरान को लेकर संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की है. बताया जा रहा है कि यदि ईरान किसी समझौते का उल्लंघन करता है, तो अमेरिका फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने पर विचार कर सकता है. हालांकि इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी रखने की संभावना भी खुली रखी है.
दो मुद्दे बन सकते हैं नए संघर्ष की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल दो बड़े मुद्दे ऐसे हैं, जो भविष्य में किसी नए संघर्ष की वजह बन सकते हैं. पहला होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से जुड़ा मामला है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है. दूसरा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिस पर अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं. यदि इन दोनों मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
यदि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच फिर से युद्ध शुरू होता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा. वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इसकी चपेट में आ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का संकट कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है.
ईरान पहले भी संकेत दे चुका है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकती हैं. ऐसी स्थिति में दुनिया भर में महंगाई बढ़ने, परिवहन लागत में इजाफा होने और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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