तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को पाकिस्तान में संभावित शांति वार्ता को लेकर अचानक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह दावा किया गया था कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, लेकिन तेहरान ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है.
ईरान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसका कोई भी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं गया है. सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ दोनों ही तेहरान में मौजूद हैं और अपने नियमित कार्यों में व्यस्त हैं. सूत्र ने यह भी कहा कि मीडिया में चल रही यह खबर कि ईरानी टीम इस्लामाबाद पहुंच चुकी है, पूरी तरह भ्रामक और गलत है.
इस बयान के बाद प्रस्तावित वार्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं. पहले यह माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की मेजबानी में बातचीत का रास्ता खुल सकता है, लेकिन ईरान के रुख ने इन उम्मीदों को झटका दिया है.
क्या बातचीत की संभावना खत्म हो गई है?
ईरान ने केवल प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने की खबरों का खंडन ही नहीं किया, बल्कि अपने रुख को और सख्त करते हुए यह भी साफ कर दिया है कि फिलहाल किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है. तेहरान का कहना है कि मौजूदा हालात में बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण नहीं है.
ईरान के अनुसार, जब तक अमेरिका लेबनान में प्रभावी रूप से सीजफायर लागू नहीं कराता और इजराइल अपने हमले बंद नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता.
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी इसी रुख को दोहराते हुए कहा है कि तेहरान का फिलहाल अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है. एजेंसी के अनुसार, क्षेत्रीय हालात में ठोस बदलाव और युद्धविराम की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे किसी कूटनीतिक पहल पर विचार किया जा सकता है.