नई दिल्ली: दुनिया भर में आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने एक बार फिर उत्तर कोरिया, ईरान और म्यांमार को अपनी ब्लैकलिस्ट (High-Risk Jurisdictions) में बनाए रखने का फैसला किया है.
FATF की 2025 की नवीनतम समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि ये तीनों देश अब भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा हैं. संस्था ने साफ चेतावनी दी है कि ये देश न तो अपने घरेलू कानूनों में पर्याप्त सुधार कर पाए हैं, न ही उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं.
ब्लैकलिस्ट में बने रहने का क्या मतलब है?
FATF की ब्लैकलिस्ट में किसी देश का नाम शामिल होना इस बात का संकेत है कि वह देश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानकों का पालन नहीं कर रहा और उसके साथ वित्तीय लेन-देन अत्यधिक जोखिमपूर्ण माना जाता है.
इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बैंक, वित्तीय संस्थान और निवेशक उन देशों के साथ सावधानीपूर्वक या सीमित लेन-देन करते हैं. इससे इन देशों की आर्थिक विश्वसनीयता पर असर पड़ता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय फंडिंग या निवेश हासिल करने में कठिनाई होती है.
FATF का उद्देश्य इन देशों पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाना है ताकि वे आतंकवाद के वित्तपोषण, भ्रष्टाचार और अवैध धन के प्रवाह को रोकने के लिए वैश्विक मानकों के अनुसार सुधार करें.
FATF की भूमिका और समीक्षा प्रक्रिया
FATF की स्थापना 1989 में हुई थी. इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है और इसमें दुनिया के 200 से अधिक सदस्य देशों और संगठनों का सहयोग है.
यह संस्था वैश्विक वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने, आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए दिशा-निर्देश और मानक तैयार करती है.
हर साल FATF सदस्य देशों की नियमित समीक्षा (Mutual Evaluation) करती है और उनकी प्रगति का आकलन करती है. इसके आधार पर देशों को तीन श्रेणियों में रखा जाता है —
म्यांमार: सुधार न होने पर बढ़ सकते हैं प्रतिबंध
FATF ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि म्यांमार अक्टूबर 2022 से ब्लैकलिस्ट में शामिल है और अब तक उसने अपने एक्शन प्लान पर पर्याप्त प्रगति नहीं की है.
संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर अक्टूबर 2025 तक म्यांमार ने ठोस सुधार नहीं किए, तो उसके खिलाफ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं.
हालांकि FATF ने माना कि म्यांमार ने कुछ क्षेत्रों में सीमित प्रगति दिखाई है, जैसे जब्त संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार, लेकिन फिर भी उसकी कानूनी और वित्तीय प्रणालियों में रणनीतिक कमियां बरकरार हैं.
रिपोर्ट में कहा गया, “म्यांमार की अधिकांश संस्थाएं FATF मानकों के अनुरूप नहीं हैं. देश को तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि उसके वित्तीय चैनलों का दुरुपयोग आतंकवाद और अवैध गतिविधियों के लिए न हो.”
ईरान की स्थिति: अब भी अधूरा है एक्शन प्लान
ईरान को FATF ने पहली बार 2016 में निगरानी में रखा था और 2018 में उसे ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया. उस समय ईरान ने FATF के साथ मिलकर एक एक्शन प्लान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य आतंकवादी संगठनों के फंडिंग नेटवर्क पर नियंत्रण स्थापित करना था.
लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अब तक अपने अधिकांश दायित्व पूरे नहीं किए हैं.
हालांकि अक्टूबर 2025 में ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी संधि (UN Convention for the Suppression of the Financing of Terrorism) से संबंधित एक कानून पारित किया, लेकिन FATF का कहना है कि मुख्य खामियां अब भी बनी हुई हैं.
FATF की समीक्षा में बताया गया कि ईरान ने 2020 से 2025 के बीच कई बार रिपोर्ट दी- जनवरी, अगस्त और दिसंबर 2024 तथा अगस्त 2025 में, लेकिन इनमें कोई ठोस या संरचनात्मक सुधार नहीं दिखाई दिया.
इस वजह से FATF ने कहा कि ईरान अभी भी उच्च जोखिम वाला देश बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को उसके साथ सभी लेन-देन में अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए.
उत्तर कोरिया: सबसे गंभीर जोखिम वाला देश
FATF ने दोहराया कि उत्तर कोरिया (Democratic People’s Republic of Korea) अब भी दुनिया के सबसे खतरनाक वित्तीय जोखिम वाले देशों में से एक है.
उत्तर कोरिया पर आरोप है कि वह अवैध हथियार कार्यक्रमों और साइबर हमलों के जरिये अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से धन जुटाता है.
रिपोर्ट में कहा गया कि प्योंगयांग ने FATF मानकों को अपनाने की दिशा में कोई सहयोग नहीं दिखाया है और वह अपने परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए शेल कंपनियों और डिजिटल चैनलों का उपयोग कर रहा है.
इस कारण FATF ने सदस्य देशों से अपील की है कि वे उत्तर कोरिया से संबंधित वित्तीय गतिविधियों को पूरी तरह सीमित करें और ऐसी किसी भी संस्था से बचें जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसके साथ जुड़ी हो.
कई देशों की प्रगति पर संतोष, कुछ ग्रे लिस्ट से बाहर
FATF ने 2025 की अपनी समीक्षा में कई देशों की स्थिति का भी मूल्यांकन किया, जिनमें अल्जीरिया, अंगोला, बुल्गारिया, बुर्किना फासो, कैमरून, कोट डी आइवर, कांगो, केन्या, लाओस, मोनाको, मोजांबिक, नामीबिया, नेपाल, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और वियतनाम शामिल हैं.
रिपोर्ट में यह राहत की बात कही गई कि बुर्किना फासो, मोजांबिक, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका को FATF की ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया है, क्योंकि इन देशों ने मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के खिलाफ ठोस और मापने योग्य कदम उठाए हैं.
यह कदम इन देशों की अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
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