तेहरान: ईरान की राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, तेहरान के प्रमुख जलाशयों में पानी इतना घट गया है कि राजधानी में अब केवल दो सप्ताह की जल आपूर्ति बची है. यह संकट लगातार पांच वर्षों से जारी सूखे, कम वर्षा और बांधों में घटते जल स्तर का नतीजा है. जल संकट से न केवल शहरवासियों के रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन भी प्रभावित हो रहे हैं.
तेहरान क्षेत्रीय जल कंपनी के प्रबंध निदेशक बेहजाद पारसा ने बताया कि शहर के बांधों में पानी का प्रवाह पिछले वर्ष की तुलना में 43 प्रतिशत कम हो गया है. उन्होंने कहा कि अमीर कबीर बांध में जल भंडार घटकर 14 मिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है, जो हाल के वर्षों में सबसे कम स्तर है. पारसा ने चेतावनी दी कि यदि वर्षा में सुधार नहीं हुआ, तो राजधानी में जल संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है.
यह शरद ऋतु 57 वर्षों में सबसे शुष्क
ईरान के राष्ट्रीय जलवायु एवं सूखा संकट प्रबंधन केंद्र के प्रमुख अहद वजीफेह ने कहा कि यह शरद ऋतु 57 वर्षों में सबसे शुष्क साबित होने की कगार पर है. उनकी जानकारी के अनुसार, देश में पिछले पांच वर्षों से लगातार सूखा बना हुआ है, जिससे जलाशयों और भूमिगत जल स्रोतों पर भारी दबाव पड़ा है. इससे न केवल पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में लोग रोजमर्रा का पानी पाने के लिए लंबी दूरी तय कर रहे हैं.
सरकार ने हालात को लेकर आश्वासन दिया है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि सरकार उद्योगों या घरों में पानी, बिजली या गैस की आपूर्ति में कटौती की योजना नहीं बना रही है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लंबे समय से सूखे और पानी के प्रबंधन में चुनौतियों के कारण संकट बढ़ा है. साथ ही, जल पुनर्चक्रण और स्मार्ट सिंचाई तकनीकों को लागू करने का संकल्प लिया गया है, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार, इन उपायों के प्रभाव दिखने में समय लगेगा.
किसानों और उपजाऊ क्षेत्रों पर संकट का असर
इस संकट का असर किसानों और उपजाऊ क्षेत्रों पर भी पड़ा है. कई क्षेत्रों में फसलें नष्ट हो गई हैं और पशुपालन प्रभावित हुआ है. इससे न केवल ग्रामीण आजीविका खतरे में है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में आ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो ईरान को खाद्य आयात बढ़ाना पड़ सकता है.
जल संकट के समाधान के लिए विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए हैं. इनमें जल संरक्षण को बढ़ावा देना, बारिश के पानी को संरक्षित करना, कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना और औद्योगिक क्षेत्रों में जल पुनर्चक्रण को अनिवार्य करना शामिल है. साथ ही, नागरिकों को जल बचत के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है.
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