ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी सेना की गतिविधियां तेज कर दी हैं. रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना ने T-72 सीरीज के कुछ मुख्य युद्धक टैंक दक्षिण-पश्चिम इलाके में भेजे हैं.
बताया जा रहा है कि इन टैंकों को अबादान के आसपास, इराक और कुवैत की सीमा के करीब तैनात किया जा रहा है. इससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि ईरान किसी संभावित जमीनी खतरे की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
टैंकों की आवाजाही क्यों अहम मानी जा रही है?
ओपन सोर्स रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 अगस्त को अहवाज-अबादान हाईवे पर भारी ट्रांसपोर्ट वाहनों पर T-72M और T-72M1 टैंक देखे गए.
ये टैंक ईरानी सेना की 92वीं आर्मर्ड डिवीजन के बताए जा रहे हैं. यह यूनिट खुजेस्तान इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है, जो ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है.
अबादान का इलाका क्यों है खास?
अबादान इराक की सीमा और फारस की खाड़ी के पास स्थित है. यह इलाका तेल के कुएं, रिफाइनरी, पाइपलाइन और बंदरगाहों के कारण काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
ईरान-इराक युद्ध के समय भी इस क्षेत्र की बड़ी रणनीतिक भूमिका रही थी. इसलिए यहां सैन्य गतिविधियों पर हमेशा नजर रहती है.
क्या जमीनी युद्ध की तैयारी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कुछ टैंकों की तैनाती से यह कहना सही नहीं होगा कि बड़ा जमीनी हमला होने वाला है.
संभव है कि ईरान अपनी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने, अहम सैन्य उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने या संभावित खतरे के लिए तैयारी कर रहा हो.
फिलहाल किसी बड़े जमीनी अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
ईरान के पास कितने T-72 टैंक हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास 1,500 से ज्यादा मुख्य युद्धक टैंक हैं. इनमें करीब 480 T-72S टैंक शामिल हैं.
ईरान ने अलग-अलग समय पर रूस, पोलैंड, बेलारूस और दूसरे देशों से T-72 टैंक खरीदे थे.
T-72 टैंक की खासियत
T-72 टैंक में 125 मिमी की मुख्य तोप लगी होती है. इसमें तीन सैनिकों का दल काम करता है और यह लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है.
यह टैंक खुले और समतल इलाकों में तेजी से मूवमेंट करने में सक्षम माना जाता है.
तनाव पर बनी हुई है नजर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है.
हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से किसी संभावित जमीनी अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए मौजूदा गतिविधियों को लेकर अलग-अलग तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं.
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