मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी प्रतिष्ठान को निशाना बनाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक संदिग्ध ड्रोन हमले में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के संचालन से जुड़े एक महत्वपूर्ण केंद्र को नुकसान पहुंचा है. यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब क्षेत्र में पहले से ही अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच टकराव चरम पर है.
रियाद स्थित अमेरिकी परिसर पर हमला
जानकारी के अनुसार, रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर मौजूद खुफिया गतिविधियों से जुड़े एक स्टेशन को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया. हमले के दौरान दो ड्रोन परिसर के ऊपर देखे गए, जिनमें से कम से कम एक ने अपने लक्ष्य को प्रभावित किया.
अमेरिकी आंतरिक अलर्ट रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आया है कि इस हमले में उस स्टेशन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और पूरे परिसर में धुआं फैल गया. हालांकि, अमेरिका और सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक तौर पर नुकसान की सीमा को लेकर सीमित जानकारी ही साझा की गई है.
खामेनेई की मौत के बाद तेज हुआ संघर्ष
इस हमले को हाल ही में हुई बड़ी घटनाओं की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. कुछ दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी. इसके बाद से ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है और क्षेत्र में अमेरिकी व सहयोगी ठिकानों को निशाना बना रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्रोन हमला उसी जवाबी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान अपने विरोधियों को सीधे संदेश देना चाहता है.
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमले
रियाद की घटना से पहले भी खाड़ी क्षेत्र में कई हमले सामने आ चुके हैं. दुबई में अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास एक बड़ा धमाका हुआ था, जिससे आग लग गई और इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इसके अलावा कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले में कई सैनिकों के मारे जाने की भी खबरें हैं.
इन लगातार घटनाओं से साफ है कि तनाव अब केवल एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैलता जा रहा है.
अमेरिका की रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करने के लिए कुर्द समूहों के साथ संपर्क में है. इराक-ईरान सीमा के पास सक्रिय कुर्द मिलिशिया को समर्थन देने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं. यह इलाका लंबे समय से विभिन्न समूहों के लिए रणनीतिक रूप से अहम रहा है.
इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन क्षेत्रों में सक्रिय समूहों पर ड्रोन हमले भी किए हैं, ताकि संभावित विद्रोह को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके.
ट्रंप प्रशासन भी है सतर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिए जाने के बाद हालात तेजी से बदले हैं. शुरुआती हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया, जिसे अमेरिका की बड़ी सफलता माना गया था.
हालांकि, ईरान की तरफ से मिल रहे जवाब ने अमेरिकी रणनीति को चुनौती दी है. खुद ट्रंप ने भी माना है कि ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षा से कहीं अधिक आक्रामक रही है, खासकर तब जब उसने उन देशों को भी निशाना बनाया है जो सीधे इस संघर्ष में शामिल नहीं थे.
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