भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि (IWT) पर लगी रोक अभी नहीं हटेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं करता, तब तक इस समझौते पर भारत का रुख नहीं बदलेगा. यह बयान पिछले साल पहलगाम हमले के बाद लिए गए फैसले की ही पुष्टि करता है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की स्थिति इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट और अटल है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद सिंधु जल संधि से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है. भारत ने यह भी कहा है कि जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद तरीके से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी.
भारत का कड़ा संदेश
भारत ने अपने बयान में कहा कि अब सिंधु जल संधि को सीमा पार आतंकवाद से अलग नहीं देखा जा सकता. भारत का मानना है कि आतंकवाद और जल समझौता साथ-साथ नहीं चल सकते. इसी कारण भारत ने पहले ही इस संधि पर रोक लगाई थी और अपना रुख सख्त रखा है.
पाकिस्तान के सामने चुनौतियां
इस फैसले के बाद पाकिस्तान के सामने गंभीर स्थिति बताई जा रही है. वहां की खेती और बिजली व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. पानी की कमी से आम लोगों की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.
पाकिस्तान पहले से ही जल संकट और आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में अगर पानी की आपूर्ति और प्रभावित होती है तो हालात और खराब हो सकते हैं.
भारत का रणनीतिक रुख
भारत का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ा हुआ है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह रुख किसी दबाव में नहीं बदलेगा. भारत यह भी मानता है कि उसकी भौगोलिक स्थिति और जल प्रबंधन क्षमता उसे इस मुद्दे पर मजबूत स्थिति देती है.
भारत के इस रुख के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. इस मुद्दे ने उन उम्मीदों को भी झटका दिया है जो लोग बातचीत और सहयोग की वापसी की उम्मीद कर रहे थे. फिलहाल भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि पर कोई भी बदलाव तभी होगा जब पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कदम उठाएगा.
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