Defence Acquisition Council (DAC): भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (DAC) की बैठक में करीब 52 हजार करोड़ रुपये के आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई. इन नए हथियारों के शामिल होने से तीनों सेनाओं की सुरक्षा, निगरानी और युद्ध क्षमता पहले से ज्यादा मजबूत होगी.
कई बड़े रक्षा प्रस्तावों को मिली मंजूरी
रक्षा खरीद परिषद ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद के लिए Acceptance of Necessity (AoN) को मंजूरी दी है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार जिन प्रमुख प्रणालियों को स्वीकृति मिली है, उनमें आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम (MRSAM), वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS), टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन शामिल हैं.
Defence Acquisition Council, chaired by Raksha Mantri Shri @rajnathsingh, has accorded Acceptance of Necessity (AoN) for proposals worth Rs 52,000 crore to strengthen the Defence Forces. For the Indian Army, approvals include AKASH TARANG Anti-UAV EW System, MPATGM, MRSAM,… pic.twitter.com/oJGVQaV94P
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) July 3, 2026
क्या होता है AoN?
रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है. इसका मतलब है कि सरकार ने किसी रक्षा उपकरण की जरूरत को मंजूरी दे दी है. इसके बाद टेंडर जारी करने, कंपनियों के चयन और खरीद प्रक्रिया की अगली कार्रवाई शुरू होती है.
नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली बैठक
यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने हिस्सा लिया. बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और नए थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे. सेना प्रमुख पहले ही कह चुके हैं कि भारतीय सेना का आधुनिकीकरण उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.
सेना को मिलेंगे नए और आधुनिक हथियार
रक्षा मंत्रालय के अनुसार आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और अन्य मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाने और उन्हें रोकने में मदद करेगी. MPATGM से पैदल सेना दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों का बेहतर मुकाबला कर सकेगी.
वहीं MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा देगा. V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा. इसके अलावा टैंकों के लिए नया एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उन्हें एंटी-टैंक मिसाइलों और दूसरे हमलों से बचाने में मदद करेगा. जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सेना की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता को भी बढ़ाएंगे.
नौसेना को भी मिलेगी नई ताकत
भारतीय नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियों को मंजूरी दी गई है. इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM), नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) शामिल हैं.
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि MIGM समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और उसकी आवाजाही को रोकने में मदद करेगा. NSUAS आधुनिक सेंसर की मदद से समुद्री निगरानी को मजबूत करेगा, जबकि LBTF नौसेना के जहाजों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम की टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होगा.
वायुसेना को मिलेगा हाई एल्टीट्यूड सिस्टम
भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है. यह सिस्टम लंबी अवधि तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, संचार और रिमोट सेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में मदद करेगा.
रक्षा बजट में पहले ही हुई है बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में 15 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की थी. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं. इस राशि का उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, तोप, मिसाइल, रॉकेट, स्मार्ट हथियार और आधुनिक ड्रोन जैसी सैन्य प्रणालियों की खरीद में किया जाएगा.
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