केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 लोगों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित कर दिया है. ये सभी नाम मुख्य रूप से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे हैं. गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है.
इन सभी 23 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है. इन्हें UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है. सरकार का कहना है कि ये लोग जम्मू-कश्मीर में आतंकी भर्ती, घुसपैठ, प्रशिक्षण, हथियारों की सप्लाई और हमलों की साजिश में शामिल रहे हैं.
हाफिज सईद के करीबी भी लिस्ट में शामिल
इस सूची में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के तीन करीबी सहयोगियों के नाम भी शामिल हैं. गृह मंत्रालय के अनुसार ये लोग भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में शामिल रहे हैं. इनमें कुछ लोग फंडिंग, भर्ती और साजिश रचने का काम करते थे.
बड़े हमलों से जुड़े नाम
सरकारी नोटिफिकेशन में कुछ ऐसे नाम भी हैं जिनका संबंध बड़े आतंकी हमलों से बताया गया है. इनमें 2016 के नागरोटा आर्मी कैंप हमले और 2018 के सुंजवां मिलिट्री स्टेशन हमले से जुड़े लोग शामिल हैं. इन पर भारत में घुसपैठ कराने और हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं.
ड्रोन और साइबर नेटवर्क से आतंक
कई आरोपियों पर ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजने का भी आरोप है. कुछ लोग सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए युवाओं की भर्ती करने और उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार करने में शामिल बताए गए हैं. सरकार का कहना है कि अब आतंकवादी संगठन आधुनिक तकनीक जैसे एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं.
फंडिंग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं जो आतंकी संगठनों के लिए फंड जुटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और हथियार पहुंचाने का काम करते थे. कुछ नामों पर विदेशी आतंकियों को भारत में घुसाने और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए हैं.
सरकार का मकसद और आगे की कार्रवाई
गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस कदम का मकसद आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना और उनकी संपत्ति जब्त करना है. इसके साथ ही इनकी यात्रा पर रोक लगाई जाएगी और पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जाएगी. सरकार का कहना है कि ड्रोन और ऑनलाइन भर्ती जैसे नए तरीकों से आतंक फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी.
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