Indore News: इंदौर, जो देशभर में स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी लगातार पहले स्थान की उपलब्धि के लिए जाना जाता है, अब ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. इंदौर नगर निगम के प्रयासों से जलूद में 210 एकड़ में 60 मेगावाट क्षमता का ग्रीन सोलर पावर प्लांट तैयार किया जा रहा है, जो न केवल नगर निगम की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी साबित होगा. यह प्रोजेक्ट इंदौर के लिए एक नई पहचान बनकर उभरेगा, और शहर को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अग्रणी बना देगा.
मेयर पुष्यमित्र भार्गव का नेतृत्व
इंदौर नगर निगम के मेयर पुष्यमित्र भार्गव के मार्गदर्शन में यह सौर ऊर्जा संयंत्र अपनी अंतिम चरण में है. यह परियोजना करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से बन रही है और इसके पूरा होने के बाद नगर निगम को हर महीने लगभग 5 करोड़ रुपये की बिजली लागत में बचत होगी. मेयर भार्गव ने इस परियोजना को शहर की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जो इंदौर को स्वच्छता के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा में भी अग्रणी बना देगा.
ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम
यह सोलर प्लांट इंदौर नगर निगम के ग्रीन एनर्जी पहल का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ, अतिरिक्त बिजली राज्य विद्युत मंडल को भी आपूर्ति की जा सकेगी. यह पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल है, और इससे कार्बन उत्सर्जन में भी काफी कमी आएगी. इसके अलावा, भविष्य में यह सौर ऊर्जा संयंत्र शहर की स्ट्रीट लाइट्स, जल वितरण प्रणाली और अन्य नागरिक सेवाओं को भी सौर ऊर्जा से संचालित करेगा.
नर्मदा पेयजल योजना पर सौर ऊर्जा का असर
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इस सौर ऊर्जा संयंत्र से जुड़ी योजना का एक और बड़ा फायदा नर्मदा पेयजल योजना में होगा. 2026 तक, नगर निगम की योजना है कि नर्मदा पेयजल योजना के पंपों को सौर ऊर्जा से चलाया जाए. इस परियोजना के पूरा होने से पानी की आपूर्ति के लिए नगर निगम को सौर ऊर्जा से मिलने वाली बिजली से ऑपरेशन करने में मदद मिलेगी, और इस तरह से नगर निगम को बड़ी बचत होगी.
ग्रीन बांड से ग्रीन एनर्जी तक
मेयर ने यह भी उल्लेख किया कि इंदौर देश का पहला शहर है, जिसने ग्रीन बांड जारी करके ग्रीन एनर्जी उत्पन्न करने की दिशा में कदम उठाया. यह शहर के लिए न केवल एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि एक मॉडल भी प्रस्तुत करता है कि कैसे स्वच्छता के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. सौर ऊर्जा से पंप चलाने से नगर निगम को कार्बन क्रेडिट्स भी मिलेंगे, जो भविष्य में अतिरिक्त आय का स्रोत बनेंगे.
बिजली बिल में बचत और भविष्य की संभावनाएं
अभी इंदौर नगर निगम का नर्मदा पेयजल योजना का मासिक बिल लगभग 30 करोड़ रुपये है, जो इस सोलर प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद करीब 25 करोड़ रुपये तक घट सकता है. हालांकि, फिलहाल 60 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है, जो केवल कुछ पंपों को संचालित करने के लिए पर्याप्त होगा. बाकी पंपों के लिए बिजली कंपनी से कनेक्शन के माध्यम से बिजली प्राप्त की जाएगी, लेकिन यह प्रोजेक्ट भविष्य में और भी अधिक पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की क्षमता बढ़ा सकता है.
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