देश के एविएशन सेक्टर में बीते कुछ दिनों से चल रहे इंडिगो संकट ने यात्रियों की यात्रा योजनाओं को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था. अचानक उड़ानें रद्द होने लगीं, सीटें कम पड़ने लगीं और एयर किराया कुछ ही घंटों में आसमान पर पहुंच गया. कई रूट्स पर टिकट की कीमतें 80 हजार से 90 हजार रुपये तक पहुंच गईं, जिससे हवाई यात्रा आम लोगों के लिए लगभग असंभव हो गई. इसी बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा और अब इसका असर किराए में आई स्थिरता के रूप में नजर आ रहा है.
सरकार ने फेयर कैपिंग लागू करते हुए सभी एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किराया तय सीमा से अधिक नहीं लिया जाएगा. 0 से 500 किलोमीटर तक की उड़ान के लिए अधिकतम 7500 रुपये, 500 से 1000 किलोमीटर के लिए 12,000 रुपये, 1000 से 1500 किलोमीटर के लिए 15,000 रुपये और उससे लंबी दूरियों की उड़ान के लिए अधिकतम 18,000 रुपये की सीमा तय की गई है. यह नियम एयरलाइंस की वेबसाइट से लेकर सभी ऑनलाइन टिकट पोर्टल्स पर लागू होगा और उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी.
किराए में आई स्थिरता, बड़े रूट्स पर गिरावट शुरू
सरकारी हस्तक्षेप का असर अब प्रमुख रूट्स पर साफ दिखने लगा है. मुंबई–दिल्ली रूट का किराया, जो इंडिगो संकट के दौरान 48 हजार रुपये तक पहुंच गया था, अब मात्र 6135 रुपये रह गया है. दिल्ली–बेंगलुरु का किराया भी जहां पहले 35 हजार रुपये तक पहुंच गया था, अब 6363 रुपये से शुरू हो रहा है. दिल्ली–पुणे, दिल्ली–कोलकाता और दिल्ली–चंडीगढ़ जैसी उड़ानों पर भी किराए में गिरावट दर्ज की गई है. कुछ ही दिनों में टिकट कीमतों का सामान्य स्तर पर लौट आना यात्रियों के लिए बड़ी राहत है.
इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से लाखों यात्री प्रभावित
इंडिगो में शुरू हुए संकट के कारण 1800 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई थीं, जिससे 2 लाख से अधिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे रहे, वैकल्पिक फ्लाइट्स उपलब्ध नहीं थीं और जिनकी उड़ानें उपलब्ध थीं, उनका किराया कई गुना बढ़ चुका था. दिसंबर का पीक ट्रैवल सीजन शुरू होने से पहले ही स्थिति गंभीर हो गई थी, जिससे लोगों की योजनाएं बिगड़ गईं.
DGCA की कमेटी करेगी संकट की जांच
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए DGCA की चार सदस्यों की एक कमेटी गठित की है. यह कमेटी इंडिगो में क्रू प्लानिंग, ऑपरेशनल तैयारी और नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम रेगुलेशन के पालन की स्थिति की जांच करेगी. साथ ही यह मूल्यांकन भी किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की स्थितियां कैसे रोकी जा सकती हैं. सरकार का कहना है कि ऐसी घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से समझौता नहीं कर सकती.
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