नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से जारी विवाद का केंद्र रहा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) एक बार फिर चर्चा में है. हाल के दिनों में भारतीय नेतृत्व और सेना के शीर्ष अधिकारियों की ओर से दिए गए बयानों से यह संकेत मिल रहा है कि भारत ने अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं.
दशहरे के दिन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान अगर सर क्रीक या किसी अन्य क्षेत्र में दुस्साहस करता है, तो उसका ऐसा जवाब मिलेगा कि "इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे". यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि भारत की उस रणनीतिक सोच की झलक है जिसमें अब ‘स्थिति को सहन करने’ की बजाय ‘स्थिति को बदलने’ की इच्छा दिखाई दे रही है.
सेना प्रमुख ने भी दिया सख्त संदेश
रक्षा मंत्री के बयान के ठीक अगले दिन थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी दो टूक कहा, "अगर पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, तो अगली बार भारत भूगोल बदल देगा."
उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में होने वाले किसी भी सैन्य ऑपरेशन में संयम नहीं बरता जाएगा और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा. ये बयान संकेत कर रहे हैं कि भारत अब पीओके को वापस लेने की रणनीतिक तैयारी में है.
गृह मंत्री की बैठक और बढ़ती गतिविधियाँ
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं कि सरकार पीओके को लेकर एक दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है. सोशल मीडिया और सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि सरकार के विभिन्न स्तरों पर ‘भूगोल बदलने’ की दिशा में गंभीर तैयारी चल रही है.
पहले रक्षामंत्री का बयान की भूगोल बदल देंगे।
— Baliyan (@Baliyan_x) October 9, 2025
उसके बाद एयरफोर्स-आर्मी चीफ के तौर ऐसे ही बयान और बाद में विदेश मंत्री ने दोहराया की POJK हमारा है।
अमित शाह जी फिलहाल JK सुरक्षा पर बड़ी बैठक कर रहे है।
निश्चित रूप से सरकार के स्तर पर तैयारी चल रही है- और वो तैयारी पाकिस्तान के… pic.twitter.com/IZxOkZHymL
पीओके: रणनीतिक दृष्टि से भारत के लिए महत्वपूर्ण
भारत के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर केवल एक भूभाग नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र रणनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. लगभग 13,000 वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके में करीब 30 लाख लोग रहते हैं. यह क्षेत्र भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि:
In Neelam Valley, resistance turns into revolution.
— Umi Rasheed (@rasheed_umi) October 8, 2025
The people of #POK are standing tall against decades of Pakistan’s brutal misrule.
History is on the side of those who refuse to bow. #PoJK #freePoJk
@theAshleyMolly @arunpudur @farooq_pm pic.twitter.com/MDCeMHY4Cd
कैसे पाकिस्तान ने कब्जा किया था पीओके?
1947-48 में ऑपरेशन गुलमर्ग के तहत पाकिस्तान ने कबायली लड़ाकों की मदद से कश्मीर पर हमला किया और जम्मू-कश्मीर के एक-तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया. यदि भारत उस समय संयुक्त राष्ट्र का रुख न करता, तो संभवतः आज पीओके भारत का हिस्सा होता. यह एक ऐतिहासिक भूल मानी जाती है जिसे आज भारत सुधारने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है.
क्यों आसान नहीं है पीओके को वापस लेना?
डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) जेएस सोढ़ी के अनुसार, पीओके को सैन्य रूप से वापस लेना एक अत्यंत कठिन कार्य होगा. उनके मुताबिक:
इसका मतलब यह है कि अगर दुश्मन के पास किसी ऊंचाई पर 100 सैनिक तैनात हैं, तो उन्हें खदेड़ने के लिए भारत को 900 सैनिकों की जरूरत होगी.
कारगिल युद्ध का उदाहरण
1999 में कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने ऐसे ही कठिन पहाड़ी इलाकों में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा था. उस समय पाकिस्तान की ओर से सीमित संख्या में सैनिक ऊँचाइयों पर तैनात थे, जिन्हें हटाने में भारतीय सेना को कई बटालियनों की जरूरत पड़ी. तब भी 9:1 रणनीति अपनाई गई थी. इस अनुभव को देखते हुए पीओके को वापस लेना कोई आसान कार्य नहीं होगा.
क्या चीन भी देगा पाकिस्तान का साथ?
पीओके में चीन के कई आर्थिक और रणनीतिक निवेश हैं, जिनमें:
चीन पहले ही भारत के अक्साई चिन क्षेत्र पर कब्जा कर चुका है, जो उसने 1962 के युद्ध में लिया था. ऐसे में अगर भारत पीओके के लिए सैन्य कार्रवाई करता है, तो चीन का हस्तक्षेप संभव है, जिससे यह संघर्ष टू-फ्रंट वॉर (दो मोर्चों पर युद्ध) में तब्दील हो सकता है.
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