शांति का ढोल पीटते रह गए ट्रंप, फेल हो गया 'पीस प्लान', इजरायल ने गाजा पर रातभर बरसाए बम, 30 की मौत

9 अक्टूबर की रात को इजरायल की सेना ने गाजा सिटी पर बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.

Israel rained bombs on Gaza overnight 30 died
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मध्य पूर्व एक बार फिर से गंभीर संकट में है. 9 अक्टूबर की रात को इजरायल की सेना ने गाजा सिटी पर बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. यह हमला ऐसे समय पर हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित "गाजा शांति योजना" को लागू करने को लेकर इजरायली कैबिनेट बैठक कर रही थी. इस हमले ने उस शांति योजना की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे ट्रंप ने "ऐतिहासिक" करार दिया था.

गुरुवार की रात इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने गाजा सिटी के सबरा क्षेत्र में एक प्रमुख इमारत को निशाना बनाकर हवाई हमला किया. हमले के परिणामस्वरूप वह इमारत पूरी तरह ढह गई और दर्जनों लोग मलबे के नीचे दब गए. गाजा की सुरक्षा एजेंसियों ने पुष्टि की कि मलबे में अब भी कई लोग फंसे हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

अब तक की स्थिति:

  • गाजा के अल-शिफा अस्पताल के अनुसार, इस हमले में 30 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है.
  • चार शव अब तक मलबे से निकाले जा चुके हैं, जबकि 40 से अधिक लोग फंसे होने की आशंका है.
  • इजरायल ने दावा किया है कि हमले का लक्ष्य हमास के सशस्त्र लड़ाके थे, जो इजरायली सीमाओं के पास सक्रिय थे.

IDF का बयान: 'हमले का मकसद आत्मरक्षा'

इजरायली सेना ने अपने बयान में कहा कि यह हमला आत्मरक्षा में किया गया. उनके अनुसार, “हमने उन आतंकियों को निशाना बनाया जो हमारे सैनिकों के लिए तात्कालिक खतरा बन चुके थे.”

IDF ने दावा किया कि यह हमला एक सटीक खुफिया सूचना के आधार पर किया गया और इसे नागरिकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचाने की योजना के तहत अंजाम दिया गया. हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि हमले में नागरिकों की मौतें हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ी है.

ट्रंप की शांति योजना: उम्मीद या असफलता?

हमले से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस बयान में दावा किया था कि इजरायल और हमास एक प्रारंभिक सीजफायर समझौते पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने इस समझौते को अपने बहुचर्चित 20-सूत्रीय 'पीस प्लान' का पहला चरण बताया था.

ट्रंप की योजना के प्रमुख बिंदु:

  • हमास सभी बंधकों को रिहा करेगा
  • इजरायल कुछ क्षेत्रों से अपनी सेना पीछे हटाएगा
  • युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए व्यापक बातचीत की शुरुआत होगी

लेकिन गाजा पर हुए हमले ने इस योजना की व्यवहारिकता और प्रभावशीलता पर सवाल उठा दिए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि जिस समय शांति की बात की जा रही थी, उसी दौरान एक बड़ा सैन्य हमला इस योजना को अविश्वसनीय बनाता है.

अमेरिका की भूमिका: निगरानी दल की तैनाती

इस पूरी स्थिति के बीच अमेरिका ने यह घोषणा की है कि लगभग 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी गाजा में सीजफायर निगरानी के लिए तैनात किए जाएंगे. इनका काम यह सुनिश्चित करना होगा कि इजरायल और हमास के बीच हुआ सीजफायर समझौता बना रहे और बंधकों की रिहाई प्रक्रिया बिना बाधा के पूरी हो सके.

निगरानी टीम के मुख्य कार्य:

  • सीजफायर उल्लंघनों पर निगरानी
  • बंधकों की रिहाई में समर्थन
  • मानवीय सहायता का समन्वय

इस कदम को अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में अपनी भूमिका को फिर से स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

भारत और इजरायल के बीच बातचीत

इस तनावपूर्ण परिस्थिति में भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की. बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने बंधकों की रिहाई के लिए हुए समझौते पर नेतन्याहू को बधाई दी और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में शांति बहाल होगी.

इजरायल प्रधानमंत्री कार्यालय का बयान, "प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की. प्रधानमंत्री मोदी ने बंधकों की रिहाई के लिए हुए समझौते की सराहना की और शांति प्रक्रिया में समर्थन व्यक्त किया."

भारत का यह रुख दर्शाता है कि वह इस क्षेत्र में स्थिरता चाहता है, साथ ही वह मानवीय संकट के समाधान को प्राथमिकता देता है.

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